Court Decision: शादीशुदा बेटियां पिता के मुआवजे की हकदार नहीं हैं
विवाहित बेटियां ससुराल में रह रही हैं और किसी भी तरह से पिता पर आश्रित नहीं है, इस कारण पिता की मृत्यु के बाद वे दुर्घटना दावा प्रकरण में मुआवजे की हकदार नहीं मानी जा सकती। यह फैसला दमोह की कोर्ट ने सुनाया है।

मध्य प्रदेश की दमोह कोर्ट ने दुर्घटना में मृत्यु के बाद मुआवजा दावा प्रकरण में एक अहम फैसला सुनाया है। एक बुजुर्ग की वाहन दुर्घटना में मृत्यु के बाद पत्नी, दो शादीशुदा, दो अविवाहित व एक बेटे ने मुआवजा दिलाने की मांग की थी। कोर्ट न विवाहित दो बेटियों का दावा खारिज करते हुए कहा कि वे विवाहित हैं और पिता पर आश्रित नहीं हैं, इस कारण हकदार नहीं हैं। बाकी परिजन के पक्ष में करीब 9 लाख 46 हजार से अधिक का मुआवजा कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया गया है।
जिला न्यायालय दमोह में पदस्थ तृतीय अपर जिला न्यायाधीश सदस्य एमएसीटी सुश्री महिमा कछवाहा के न्यायालय ने दुर्घटना प्रकरण में 10,52,700 रुपए का आदेश पारित करते हुए निर्धारित किया की विवाहित पुत्रियां मृतक पर आश्रित नहीं हैं, जिस कारण मुआवजे की हकदार नहीं। शेष आवेदकगण के पक्ष में अवार्ड पारित करते हुए मुआवजा दिलाए जाने का आदेश पारित किया गया है।

आवेदकगण के अधिवक्ता मुकेश पाण्डेय ने बताया है कि दिनांक 18 जून 2018 को हिंडोरिया निवासी सीताराम चौरसिया जागेश्वरनाथ मंदिर में आयोजित विवाह सम्मेलन से रात्रि करीब 11 बजे वापस अपने घर पैदल आ रहा था कि उसी समय ओमनी कार के चालक रामलाल ने टक्कर मार दी, जिससे सीताराम की मृत्यु हो गई थी। प्रकरण में मृतक की पत्नी दो अविवाहित पुत्रियों, दो विवाहित पुत्रियों एवं एक पुत्र को पक्षकार बनाते हुए मुआवजे की मांग की गई थी। जिस पर न्यायालय द्वारा न्याय दृष्टांतओं का हवाला देते हुए आदेश किया है कि विवाहित पुत्रियां मृतक पिता पर आश्रित नहीं थीं, इस कारण मुआवजे की हकदार नहीं है।
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न्यायालय द्वारा 10,52,700 रुपए का अवॉर्ड पारित किया है उक्त राशि में से दोनों विवाहित पुत्रियों को प्राप्त होने वाले 88 हजार की मुआवजा राशि को कम किया गया है। अनावेदकगणों को कोर्ट ने आदेश दिया कि शेष अवॉर्ड राशि 9,64,700 रुपए न्यायालय में जमा करें, जो कि अवार्ड अनुसार प्रत्येक पक्षकार को भुगतान की जाएगी।












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