अवैध धर्मांतरण मामला: NCPCR अध्यक्ष को फोन पर धमकी, सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो को दमोह में ईसाई मिशनरी, धर्मांतरण व बालिका के यौन शोषण मामले में एक सरकारी कर्मचारी से धमकी मिली है। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों की मिली भगत के आरोप लगाए हैं।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दमोह धर्मांतरण को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि अवैध धर्मांतरण कराने वालों के साथ सरकार के कर्मचारी कई स्तर पर मिले हुए हैं। आयोग की छापामार कार्रवाई के बाद एक कर्मचारी ने उन्हें फोन पर रिकॉर्डिंग कर धमकाने का प्रयास किया था।
National Child Protection Rights Commission (NCPCR) अध्यक्ष प्रिंयक कानूनगो ने दमोह धर्मांतरण के मामले को लेकर ट्वीट किया है। इसे उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी टैग किया है। उन्होंने लिखा है कि अवैध धर्मांतरण करने वालों के साथ सरकार के कर्मचारी कई स्तरों पर मिले हुए हैं।

उन्होंने आगे लिखा है कि विभाग के कर्मचारियों को 20 दिन से पता था कि बच्चियों का यौन शोषण हो रहा था, जो कि उन्होंने पुलिस को नहीं बताया। पूरे मामले को छिपाया गया यहां तक कि इस बारे में फ़ोन पर बात करने पर विभाग के कर्मचारी शालीन शर्मा ने मुझे ही कॉल रिकॉर्डिंग कर धमकाने का प्रयास किया।
अवैध धर्मांतरण करने वालों के साथ सरकार के कर्मचारी कई स्तरों पर मिले हुए हैं।
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) June 11, 2023
विभाग के कर्मचारियों को 20 दिन से पता था कि बच्चियों का यौन शोषण हो रहा था जो कि उन्होंने पुलिस को नहीं बताया पूरे मामले को छिपाया गया यहाँ तक कि इस बारे में फ़ोन पर बात करने पर विभाग के कर्मचारी शालीन… https://t.co/1W5duSqLBe
लगातार ट्वीट कर NCPCR अध्यक्षक ने जानकारी साझा की है
@NCPCR अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इसके पूर्व ट्वीट में लिखा था कि 'दमोह मध्यप्रदेश में मिशनरी माफिया अजय लाल द्वारा संचालित बालगृह के कर्मचारी द्वारा एक बालिका को यौन प्रलोभन देने का मामला सामने आया है, कुछ दस्तावेज मिले हैं।
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राज्य बाल आयोग के सदस्यों की टीम दमोह में जांच के लिए पहुंची है। उल्लेखनीय है कि यह बाल,गृह किशोर न्याय अधिनियम की निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है व पूर्व में भी @NCPCR_ द्वारा सरकार को बताया गया है तथा FIR भी दर्ज हुई है,परंतु कतिपय सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों की कर्तव्य के प्रति आपराधिक लापरवाही का परिणाम है कि किशोरवय बालिकाएं ग्रूमिंग एवं यौन दुराचार का शिकार हो रही हैं।












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