MP के इस शहर में सरकारी छुट्टी, अचानक कलेक्टर ने क्यों लिया फैसला, जानिए

मध्यप्रदेश के ग्वालियर में आयोजित हो रहे तानसेन संगीत समारोह में 18 दिसंबर को तानसेन अलंकरण कार्यक्रम होगा। इस दिन अधिकाधिक संगीत प्रेमी तानसेन समारोह की संगीत सभाओं का आनंद उठा सकें इसके लिए संभाग आयुक्त मनोज खत्री ने 18 दिसंबर को ग्वालियर जिले के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया है।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर को संगीत की नगरी कहा जाता है, जहां ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ संगीत की विरासत बेहद पुरानी है। यही कारण है कि, यहां इन दिनों तानसेन संगीत समारोह आयोजित किया जा रहा है।

Indore

तानसेन संगीत समारोह के 100वें उत्सव में तीसरे दिन सायंकालीन सभा में पहली सभा भारतीय संगीत महाविद्यालय, ग्वालियर का ध्रुपद गायन हुआ। राग यमन कल्याण में निबद्ध प्रस्तुति में ताल चौताल की बंदिश आदि देव महादेव महेश्वर.... से संगीत सभा का शंखनाद किया। इस प्रस्तुति का संयोजन संजय देवले ने किया।

इसके बाद विश्व संगीत सभा के अंतर्गत एटीएन कैबारे, क्रिस्टोफे राॅचेर एवं निकोला प्वांटार्ड के संगीत बैंड की प्रस्तुति हुई। उन्होंने ऊर्जा और उत्साह से भरपूर जैज संगीत से संगीतप्रेमियों को रोमांचित कर दिया। आप तीनों ही कलाकार फ्रांस से थे और आपका संगीत भी वहां की परंपराओं और रचनाओं पर आधारित था। अगले क्रम में मंच पर नमूदार हुए पंडित (डॉ.) नागराजराव हवलदार। किराना एवं जयपुर-अतरौली घराना की परम्पराओं को साधे पंडित हवलदार ने कर्नाटक संगीत की राग अभोगी को अपने गायन के लिए चुना। इसमें उन्होंने मंथलाई, झपताल, द्रुत एक ताल और द्रुत तीन ताल में बंदिश सुनाकर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया।

माधुर्य से भरपूर गायन के बाद अवसर था बांसुरी की मीठी महक में डूब जाने का। भगवान श्रीकृष्ण का पसंदीदा वाद्ययंत्र बांसुरी जब अधरों पर रख वादक मन और आत्मा में बसे अथाह प्रेम, प्रीत, अनुराग को वायु प्रवाह के माध्यम से महकाता है तो ब्रज के अनंत आनन्द की अनुभूति हो जाती है। ऐसी ही अनुभूतियां तानसेन समाधि परिसर में बने पवित्र मंच के सम्मुख बैठे सुधि श्रोताओं को हुई। क्योंकि इस मंच पर देश के शीर्ष बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार की सभा सजी थी। पंडित जी मुस्कुराहट के साथ श्रोताओं से रुबरु हुए। उन्होंने अपने वादन के लिए मधुर राग रागेश्री का चयन किया। उन्होंने खमाज में एक धुन सुनाई और बनारसी ठुमरी के साथ अपने वादन को विराम दिया।

पद्मश्री शुभा मुद्गल का गायन

तीसरे दिवस की सायंकालीन सभा की अंतिम प्रस्तुति सुप्रसिद्ध गायिका पद्मश्री शुभा मुद्गल के गायन की रही। सहज और सरल स्वभाव की धनी सुश्री शुभा मुद्गल की सुरीली गायिकी पर संगीतप्रेमी निहाल हो गए। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के लिए राग मारुबिहाग का चयन किया। इस सुन्दर राग में अपने विलंबित बंदिश रूपक ताल में पेश की, जिसके बोल थे मोहन माधो मधुबन....। इसके बाद मध्य लय की बंदिश त्रिताल में प्रस्तुत की, जिसके बोल थे मन मोहन छबीला मन भवनदा....। सर्द रात में इस सुखद गायिकी के आनन्द ने संगीतप्रेमियों को बहुत सुकून प्रदान किया।

ये भी पढ़े- MP की जनता को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का फिटनेस मंत्र, Viral Video देख हर कोई चौंका

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+