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MP News: CM मोहन यादव ने 12 स्कूली छात्रों को दी मुफ्त स्कूटी, जानिए बाकी के विद्यार्थियों को कैसे मिलेगी

Bhopal MP News: भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आज एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 12 स्कूली विद्यार्थियों को स्कूटी की चाबियां सौंपी।

यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा प्रतिभाशाली छात्रों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों के 7,800 ऐसे छात्रों को प्रतीकात्मक रूप से प्रमाण पत्र भी दिए, जिन्हें मुफ्त में स्कूटी दी जाएगी।

CM Mohan Yadav gave free scooty to 12 school girls student in Bhopal know the scheme

स्कूटी योजना: छात्रों को मिलेगा प्रोत्साहन और सुविधा

मध्य प्रदेश सरकार की स्कूटी योजना ने राज्य के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बड़ा प्रोत्साहन दिया है। इस योजना के तहत, विशेष रूप से 12वीं कक्षा के टॉपर्स और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्कूटी दी जाएगी ताकि वे अपनी पढ़ाई और अन्य कार्यों के लिए यात्रा में आसानी महसूस कर सकें। यह योजना विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें उनकी मेहनत और सफलता के लिए सम्मानित करती है।

योजना की शुरुआत और पात्रता

योजना की शुरुआत 2023 में हुई थी और इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के प्रतिभाशाली छात्रों को सुविधाएं प्रदान करना है। इस योजना के तहत 12वीं कक्षा के टॉपर्स और अन्य योग्य विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस योजना का शुभारंभ करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य की ओर प्रेरित किया।

CM Mohan Yadav gave free scooty to 12 school girls student in Bhopal know the scheme

स्कूटी के प्रकार और वितरित राशि

सरकार की तरफ से विद्यार्थियों को आई स्कूटी या पेट्रोल वाली स्कूटी के विकल्प दिए गए हैं। यह पूरी तरह से विद्यार्थियों की चुनौती पर निर्भर करेगा कि वे किस प्रकार की स्कूटी पसंद करते हैं। इसके लिए दो किस्तों में राशि प्रदान की जाती है - एक किस्त पहले और दूसरी किस्त बाद में, जो स्कूटी प्राप्त करने की प्रक्रिया को सहज बनाती है।

अगले चरण में बाकी विद्यार्थियों को कैसे मिलेगा लाभ

अब तक, 12वीं कक्षा के टॉपर्स और कुछ विशेष विद्यार्थियों को स्कूटी दी जा चुकी है, लेकिन आने वाले समय में अन्य योग्य विद्यार्थियों को भी इस योजना का लाभ मिलने की संभावना है। योजना के अगले चरण में, जिन विद्यार्थियों ने अपनी अकादमिक और सामाजिक उपलब्धियों से ध्यान आकर्षित किया है, उन्हें स्कूटी दी जाएगी। इसके लिए स्कूलों से सिफारिश की जाएगी और स्कॉलरशिप या प्रतिभा के आधार पर चयन किया जाएगा।

नैतिकता और संस्कार की अहमियत

मुख्यमंत्री ने कहा, "मेरिट से काम नहीं बनेगा, नैतिकता भी चाहिए। घर के अंदर कुछ भी चलता रहे, लेकिन बाहर यह बात नहीं जानी चाहिए। हमारे संस्कार ऐसे होने चाहिए कि हम आपस के मनमुटाव को बाहर दिखने न दें।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रतिभाशाली बच्चे जीवन में बहुत कुछ कर सकते हैं, लेकिन उन बच्चों में संस्कार होना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिर्फ पढ़ा-लिखा व्यक्ति ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि जीवन में गुणी और नैतिक व्यक्ति का होना भी आवश्यक है।

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विक्रमादित्य और विपरीत क्रम की परिभाषा

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में एक ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए विक्रमादित्य का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "जो विपरीत क्रम को तेजी से लागू करे, वही विक्रमादित्य कहलाता है।" मुख्यमंत्री ने पन्ना धाय का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने अपने ही बच्चे की हत्या होते देखी, लेकिन इसके बावजूद अपने देश और अपने राज्य के हित में यह कार्य किया। उन्होंने कहा, "कंस के अत्याचार पर उसे मारने के बाद भगवान कृष्ण ने सत्ता पर फिर महाराज को बैठाकर गणतंत्र की स्थापना की।"

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "सहसांक विक्रमादित्य असंभव को संभव करने वाले व्यक्ति थे। सुक्रम (आसान क्रम) तो कोई भी कर सकता है, लेकिन विक्रम (विपरीत क्रम) तो सिर्फ विक्रमादित्य ही कर सकते हैं।" उनके इस बयान ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि जीवन में मुश्किलें और विपरीत परिस्थितियाँ आएं, तो भी अगर सही नैतिकता और साहस हो, तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

प्रेरणादायक माहौल और बच्चों के लिए दिशा

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ जीवन के सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने इस अवसर का लाभ उठाया है, वे न केवल अपने स्कूल में बल्कि समाज में भी अच्छे नागरिक के रूप में उभरें। उन्हें नैतिकता, संस्कार, और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाना, उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनाना हमारी प्राथमिकता है।

चुनाव जीतने पर हर साल भैया बुलेट देते थे

मुख्यमंत्री ने अपने भैया के साथ एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए कहा, "वर्ष 1982 में मेरे भैया ने मुझे चुनाव लड़ने की सलाह दी। मैंने उनसे पूछा कि अगर मैं जीत गया तो मुझे क्या मिलेगा? भैया ने जवाब दिया, 'तुम्हें बुलेट दूंगा।'" यह बात मुख्यमंत्री ने हंसते हुए साझा की। उन्होंने बताया कि इसके बाद, 1988 तक उन्होंने खुद और अपनी पार्टी को चुनाव जिताया, और हर साल उनके भैया उन्हें नई बुलेट दिलाते रहे। मुख्यमंत्री ने मजाक करते हुए कहा, "बुलेट तो मिल जाती थी, लेकिन पेट्रोल का खर्च समझ में आता था। आप लोग भाग्यशाली हैं कि अब आपको इलेक्ट्रिक व्हीकल मिला है, जिसे आप कितना भी चला सकते हैं।"

मुख्यमंत्री का यह अनुभव कार्यक्रम में मौजूद बच्चों और उनके परिजनों के लिए एक प्रेरणा बन गया, जो शिक्षा और मेहनत के साथ अपने भविष्य को संवारने के लिए काम कर रहे हैं।

बेहतर शिक्षा दे रहे मध्यप्रदेश के स्कूल

कार्यक्रम के दौरान, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, "आज मिलने वाली स्कूटी बच्चों को उनके शैक्षणिक जीवन में नई ऊर्जा प्रदान करेगी। इससे उन्हें अपने शिक्षण कार्य में मदद मिलेगी और समय और संसाधनों की कमी से राहत मिलेगी।" मंत्री ने यह भी कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली बच्चों को कैरियर गाइडेंस, स्मार्ट क्लास, और वोकेशनल ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं प्रदान कर रही है, जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य के स्कूल अब गरीब बच्चों को सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि उनका शैक्षिक जीवन और करियर बेहतर हो सके।

गरीब परिवार के बच्चों को दी जा रही है सुविधा

जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने इस अवसर पर सरकार की नीति की सराहना करते हुए कहा, "बड़े परिवारों के बच्चों को कॉलेज जाने के लिए गाड़ी मिलती है, लेकिन गरीब परिवारों के बच्चों को इस तरह की सुविधाएं देना एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने यह काम किया है।" उन्होंने यह भी कहा, "जिन बच्चों को स्कूटी मिली है, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने माता-पिता की ओर से मुख्यमंत्री को धन्यवाद पत्र भेजें।" मंत्री विजय शाह ने यह भी कहा कि अगर बच्चों के माता-पिता खुश हैं, तो वे इसे भेजें, लेकिन अगर वे खुश नहीं हैं, तो इस पत्र को भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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