MP News: मध्य प्रदेश में उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी में घमासान, सिंधिया बोले- मुझसे प्रचार करने का नहीं कहा
MP News: मध्य प्रदेश के दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद राज्य में राजनीति में गरमागरमी छिड़ गई है। खासतौर पर विजयपुर सीट पर हुए चुनाव परिणामों ने बीजेपी में अंदरूनी संघर्ष को उजागर कर दिया है।
विजयपुर सीट से भाजपा के कैबिनेट मंत्री रामनिवास रावत की हार के बाद, जहां कांग्रेस में उत्साह का माहौल है, वहीं रावत ने अपनी हार का ठीकरा अपने ही पार्टी के लोगों पर फोड़ते हुए कई सवाल उठाए हैं।

यदि मुझसे विजयपुर सीट पर प्रचार का कहा होता, तो मैं जरूर जाता- सिंधिया
विजयपुर सीट पर भाजपा की हार से न केवल मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा संगठन परेशान हैं, बल्कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस हार को चिंता का विषय माना है। बता दे सिंधिया इस उपचुनाव में प्रचार के लिए नहीं पहुंचे थे, जब शुक्रवार को वे ग्वालियर पहुंचे तो उन्होंने कहा, "हमें चिंतन करना होगा। यह हार चिंता की बात है। यदि मुझसे वहां प्रचार का कहा होता, तो मैं जरूर जाता। मैं जनता का सेवक हूं।"
भाजपा संगठन की ओर से जवाब
सिंधिया के इस बयान ने भाजपा संगठन में हलचल मचा दी है। उनके बयान के बाद शनिवार देर रात भाजपा संगठन की ओर से जवाब आया। पार्टी के प्रदेश महामंत्री और विधायक भगवानदास सबनानी ने स्पष्ट किया कि विजयपुर उपचुनाव में सिंधिया को प्रचार के लिए बुलाया गया था। उन्होंने कहा, "विजयपुर के स्टार प्रचारकों की सूची में सिंधिया का नाम था। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री ने उन्हें विजयपुर में आने के लिए आग्रह किया था। उन्होंने अपनी व्यस्तता के चलते प्रचार में भाग लेने से मना किया था। ऐसा नहीं है कि उन्हें नहीं बुलाया गया था।"
इस विवाद से परे, विजयपुर सीट की जटिल राजनीति भी भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। खासकर तब जब विजयपुर में कांग्रेस के उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा ने रामनिवास रावत को हराया। इस हार के साथ ही रावत ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए यह आरोप लगाया कि उन्हें सही समर्थन नहीं मिला। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान जब रावत कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, तब उनका पार्टी में स्वागत हुआ था।

वहीं, मुकेश मल्होत्रा की जीत ने कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। मल्होत्रा, जो सहरिया समुदाय से आते हैं, ने रावत को हराकर न केवल अपनी पार्टी का विश्वास बढ़ाया, बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों को भी एक बार फिर से चुनौती दी। विजयपुर में सहरिया समुदाय की संख्या अधिक है, और इस समुदाय का समर्थन कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हुआ। मुकेश मल्होत्रा, जो पिछली विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में तीसरे नंबर पर रहे थे, अब कांग्रेस जॉइन कर चुके हैं और उन्हें इस उपचुनाव में सफलता मिली है।
रामनिवास रावत की हार और इसके बाद के बयानों ने भाजपा के भीतर मंथन को जन्म दिया है। पार्टी की अंदरूनी राजनीति में इस हार के बाद कई सवाल उठने लगे हैं कि क्या भाजपा नेताओं के बीच तालमेल की कमी और चुनावी रणनीतियों की असफलता का असर दिख रहा है। वहीं, कांग्रेस अपने इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रही है और रावत की हार को भाजपा के लिए एक बड़ा झटका मानती है।
इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं और आगामी चुनावों में दोनों ही पार्टियों को अपनी रणनीतियां फिर से खंगालनी होंगी। भाजपा को यह समझने की आवश्यकता होगी कि पार्टी की चुनावी हार केवल रणनीति या प्रचार की कमी से नहीं, बल्कि संगठनात्मक ढांचे की भी कमजोरी से जुड़ी हो सकती है।
रावत का दर्द: "कुछ लोगों ने मुझसे दुश्मनी निकाली"
रावत ने अपनी हार को लेकर कहा, "कुछ लोगों को यह डर था कि मेरे भाजपा में आने के बाद उनका राजनीतिक वजूद खत्म हो जाएगा। उन्हीं लोगों ने मुझे हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन लोगों ने पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को गुमराह किया और जनता को भ्रमित किया, ताकि वे मेरी हार सुनिश्चित कर सकें।" रावत का यह बयान पार्टी में उनके खिलाफ किसी साजिश का संकेत देता है, और यह भाजपा के भीतर के उन नेताओं को कठघरे में खड़ा करता है, जिनका रावत के साथ मनमुटाव था।
मतगणना के दौरान दिखी थी कांटे की टक्कर
विजयपुर उपचुनाव की 23 नवंबर को हुई मतगणना में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। पहले राउंड में कांग्रेस को 178 वोटों की बढ़त मिली, लेकिन उसके बाद के राउंड में भाजपा ने बढ़त बनाई। हालांकि, यह बढ़त ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। दूसरे राउंड से लेकर 15वें राउंड तक भाजपा लगातार आगे रही, लेकिन अंत में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने करीब 7 हजार वोटों के अंतर से रावत को हराया। यह परिणाम भाजपा के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ, खासतौर पर तब जब पार्टी की पूरी ताकत इस सीट पर लगी हुई थी।












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