मां ने नवजात को जीरो डिग्री तापमान में मरने छोड़ा, देवदूत बनकर आई महिला ने कुत्तों से बचाया
नौगांव अस्पताल के बाहर शॉल में लिपटे एक नवजात को कुत्ते खींचने का प्रयास कर रहे थे, तभी एक महिला की नजर पड़ गई और दौड़कर उसे कुत्तों से बचाया। बार्मर में रखने के बाद बच्चा अब सुरक्षित है।

कहते हैं, माता कभी कुमाता नहीं होती... लेकिन छतरपुर जिले के नौगांव में एक निर्दयी मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को जन्म के चंद घंटों बाद जीरो डिग्री तापमान में मरने के लिए अस्पताल के बाहर छोड़ दिया था। शॉल में लिपटे नवजात को कुत्ते शॉल पकड़कर खींच रहे थे, तभी एक महिला की नजर पड़ी और उसने दौड़कर बच्चे को छुड़ाया। बच्चा महज 24 घंटे पहले जन्मा था, अस्पताल की शिशु इकाई में बच्चे को तुरंत बार्मर में रखकर इलाज दिया गया तो बच्चे की जान बच गई है।

छतरपुर जिले के नौगांव में शनिवार की सुबह सिविल अस्पताल परिसर में खून जमा देने वाली कड़ाके की ठंड में एक नवजात बच्चा लावारिस हालत में पड़ा था। नवजात को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। इलाज के बाद बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित बताया जा रहा है। अस्पताल से मिली जानकारी अनुसार शनिवार सुबह छतरपुर जिले के नौगांव में सिविल अस्पताल की बाउंड्री के पास तड़के सुबह एक अज्ञात नवजात शिशु कंबल में लिपटा हुआ लावारिस हालत में पड़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बच्चे का शॉल पकड़कर दो कुत्ते उसे खींचकर ले जाने का प्रयास कर रहे थे, तभी पास ही रहने वाली एक महिला अभिलाषा सोनी सुबह की सैर पर निकली थीं, उनकी नजर पड़ गई। अभिलाषा से लकड़ी से कुत्तों को भगाया और बच्चे की जानकारी आसपास मौजूद लोगों के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन को भेजी।
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डॉक्टर मौके पर पहुंचे और बच्चे को बार्मर में रखा
अस्पताल परिसर में जीरो डिग्री तापमान में एक नवजात के पड़े होने की सूचना के बाद बीएमओ डॉक्टर रविंद्र पटेल तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को हॉस्पिटल लाए। नवजात को शिशु रोग इकाई में बार्मर में रखकर इलाज किया गया था। बच्चे की जान बच गई है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चा स्वस्थ्य है और उसे बेहतर देखरेख व इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।












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