MP News: स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव: मंत्री राव उदय प्रताप सिंह बोले- "एससीईआरटी को मजबूत करें
MP News: मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है! स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है। उन्होंने कहा कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को सुदृढ़ करना होगा, ताकि शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से अपडेट रखा जा सके।
इसके साथ ही, 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में स्कूलों में नामांकन दर बढ़ाने के लिए जन-प्रतिनिधियों और समाज के सभी वर्गों की मदद ली जाएगी। यह बातें मंत्री सिंह ने बुधवार, 26 मार्च 2025 को मंत्रालय में नई शिक्षा नीति-2020 की टॉस्क फोर्स समिति की बैठक में कही। इस बैठक में कई अहम सुझाव सामने आए, और शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कई बड़े कदमों की रूपरेखा तैयार की गई।

"शिक्षकों पर प्रशासनिक बोझ कम करें, संसाधनों का 100% उपयोग हो!"
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बैठक में साफ कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों को सशक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा, "एससीईआरटी को सुदृढ़ करने की जरूरत है। शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से अपडेट रखें, ताकि वे बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकें।" उन्होंने यह भी जोर दिया कि शिक्षकों पर प्रशासनिक कार्यों का बोझ कम किया जाए, ताकि वे पूरी तरह से पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।
मंत्री ने स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों का शत-प्रतिशत उपयोग करने की बात कही। उन्होंने कहा, "स्कूलों में जो संसाधन हैं, उनका पूरा इस्तेमाल होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।" इसके साथ ही, उन्होंने प्राध्यापकों को नामांकन बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने कहा, "प्राध्यापक यह सुनिश्चित करें कि उत्तीर्ण विद्यार्थियों को टीसी देने के बाद उनकी आगे की पढ़ाई के लिए पुन: प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हो। मैदानी अमला शालावार इसकी समीक्षा करे।"
नामांकन बढ़ाने के लिए जन-प्रतिनिधियों की मदद
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूलों में नामांकन दर बढ़ाने के लिए एक नया प्लान पेश किया। उन्होंने कहा, "1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में नामांकन बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग लिया जाए। जन-प्रतिनिधियों की मदद से हम ज्यादा से ज्यादा बच्चों को स्कूलों तक ला सकते हैं।" इस सुझाव को टॉस्क फोर्स के सदस्यों ने भी सराहा। बैठक में यह भी सुझाव आया कि प्रारंभिक स्तर पर बच्चों को योग की शिक्षा दी जाए, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें।
नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन: बच्चों को मिलेगा "जादूई पिटारा"
बैठक में नई शिक्षा नीति-2020 के तहत किए जा रहे कामों की समीक्षा भी की गई। बताया गया कि प्रदेश में 4473 पूर्व प्राथमिक शालाओं में करीब 1 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इन शालाओं के शिक्षकों को प्रारंभिक बाल्यावस्था की देखभाल और शिक्षा का प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही, इन बच्चों को पीएम पोषण योजना का लाभ देने के लिए शिक्षा पोर्टल पर प्रावधान किया गया है।
मिशन अंकुर के तहत प्राथमिक कक्षाओं में लर्निंग किट और "जादूई पिटारा" उपलब्ध कराया गया है। यह जादूई पिटारा बच्चों को पढ़ाई में रुचि जगाने के लिए बनाया गया है। कक्षा 1 और 2 के बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) मेला आयोजित किया गया। इस मेले में अभिभावकों को बच्चों की क्षमता के बारे में कार्ड दिए गए। इसके अलावा, फ्लोर गेम के जरिए बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाई सिखाने की व्यवस्था की गई है। करीब 40 हजार आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे छोटे बच्चों की शिक्षा में मदद कर सकें।

ड्रॉपआउट रोकने की कोशिश: अप्रैल में मिलेंगी मुफ्त किताबें
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि प्रदेश में ड्रॉपआउट दर को कम करने और शिक्षा की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "इस शैक्षणिक सत्र में बच्चों को मुफ्त पाठ्य-पुस्तकें अप्रैल माह में ही उपलब्ध करा दी जाएँगी। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।"
इसके साथ ही, विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। इस साल छात्रवृत्ति, गणवेश, और साइकिल की व्यवस्था शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही कर ली जाएगी। प्रदेश में 3471 हाई स्कूलों और हायर सेकेंडरी स्कूलों में अत्याधुनिक आईसीटी लैब तैयार की गई हैं। साथ ही, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल के 44 हजार शिक्षकों को टैबलेट खरीदने के लिए राशि दी जा चुकी है।
टॉस्क फोर्स की बैठक: सुझावों का मंथन
टॉस्क फोर्स की बैठक में कई अहम सुझाव सामने आए। बैठक में टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष और शुल्क विनियामक समिति के रवीन्द्र कान्हेरे, हिन्दी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कड़ैल, आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता, सचिव माध्यमिक शिक्षा मण्डल कृष्णदेव त्रिपाठी, पूर्व आयुक्त लोक शिक्षण जयश्री कियावत, और पूर्व अपर संचालक लोक शिक्षण धीरेन्द्र चतुर्वेदी सहित कई सदस्य मौजूद थे।
सदस्यों ने शिक्षा में तकनीक के उपयोग, शिक्षकों के प्रशिक्षण, और बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए खेल-आधारित शिक्षा पर जोर दिया। एक सदस्य ने सुझाव दिया कि स्कूलों में बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर योग सिखाया जाए, ताकि वे तनावमुक्त रहें और पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।
सोशल मीडिया पर चर्चा: "शिक्षा में बदलाव की जरूरत!"
इस बैठक के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है। एक यूजर ने लिखा, "मंत्री जी ने सही कहा। शिक्षकों को अपडेट करना जरूरी है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कितना असर होगा, यह देखना होगा।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "नामांकन बढ़ाने के लिए जन-प्रतिनिधियों की मदद लेना अच्छा कदम है। लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ भी बढ़ानी होंगी।" कुछ लोगों ने ड्रॉपआउट रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, "अप्रैल में मुफ्त किताबें और गणवेश मिलना बड़ी बात है। इससे गरीब बच्चों को स्कूल आने में मदद मिलेगी।"
एक नई शुरुआत: क्या होगा असर?
मंत्री उदय प्रताप सिंह की यह पहल मध्यप्रदेश की स्कूल शिक्षा में एक नई शुरुआत हो सकती है। एससीईआरटी को सुदृढ़ करने, शिक्षकों को अपडेट रखने, और नामांकन बढ़ाने के लिए जन-प्रतिनिधियों की मदद लेने का प्लान शिक्षा में गुणात्मक सुधार ला सकता है। जादूई पिटारा, फ्लोर गेम, और FLN मेला जैसे कदम छोटे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जगा सकते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह प्लान जमीनी स्तर पर उतना ही प्रभावी होगा, जितना कागजों पर दिख रहा है? मध्यप्रदेश में पहले भी कई शिक्षा सुधार योजनाएं शुरू हुई हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की हालत अभी भी चिंताजनक है। शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव, और ड्रॉपआउट दर जैसे मुद्दे अभी भी बरकरार हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि मंत्री उदय प्रताप सिंह का यह प्लान कितना सफल होता है।
सीनियर रिपोर्टर: LN मालवीय












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