चीतों के गले में सैटेलाइट 'कॉलर' बनी जानलेवा, अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट आकर निकालेंगे रास्ता
चीतों की लगातार मौत के मामले में 'सैटेलाइट कॉलर आईडी' (Satellite Caller ID) के नीचे चमड़ी में जानलेवा बैक्टीरिया, कीड़ों से बने सेप्टिसीमिया इंफेक्शन से चीतों की मौतों ने विशेषज्ञों तक को झकझोर दिया है। अब विदेशी एक्सपर्ट की सलाह ली जा रही है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को कूनो बुलाया गया है। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भोपाल में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जल्द ही इंटरनेशनल एक्सपर्ट कूनो आएंगे।

गले में घाव व कीड़ों पड़ने से शरीर में फैला संक्रमण
कूनो में नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी चीतों की मौत का जो कारण निकलकर सामने आया है, उसने कूनो प्रबंधन से लेकर केंद्र तक को चिंता में डाल दिया है। सैटेलाइट कॉलर आईडी से चीतों के गले में उपजे इंफेक्शन और उसमें कीड़े पड़ने से चीतों के ब्लड में सेप्टिसीमिया का इंफेक्शन पहुंच गया, जो चीतों की अकस्मात मौत का कारण बन रहा है। बाकी बचे चीतों के गले में भी रेडियो कॉलर लगा है। यह गले में काफी टाइट, वजनी होता है। बारिश के पानी, मौसम में नमी, गर्मी, के कारण इसमें इंफेक्शन पनपने लगा और धीरे-धीरे गले की त्वचा में जलन व इंफेक्शन हो रहा है। यह जानलेवा बन रहा है।
बाकी चीतों को भी हो सकता है संक्रमण, खतरा बरकरार
हाल में चार दिन के अंतराल से चीता तेजस और सूरज की मौत और उसके जो कारण सामने आए हैं उसने कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन तो ठीक सरकार और चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को चिंता में डाल दिया है। कूनो के बाड़े में मौजूद और जंगल में खुले छोड़े गए चीतों के गले में भी रेडियो कॉलर आईडी लगा है। कहीं उन्हें भी इस तरह का संक्रमण तो नहीं हो रहा, इसको लेकर चिंता बढ़ गई है।












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