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Rajgarh News: नरवाई जलाना पड़ा भारी, 9 किसानों पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, प्रशासन ने दिखाई सख्ती

Rajgarh News: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में किसानों द्वारा खेतों में नरवाई जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए 9 किसानों पर कुल 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

खेतों में फसल कटाई के बाद बची पराली (नरवाई) को जलाना न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

Burning stubble in Rajgarh at mp proved costly 9 farmers were fined Rs 25 000

पानखेड़ी और आसपास के गांवों में दिखी लापरवाही

प्रशासन की टीमों ने तहसील खिलचीपुर और जीरापुर ब्लॉक के विभिन्न गांवों में निरीक्षण के दौरान नरवाई जलने की पुष्टि की। ग्राम पंचायत पानखेड़ी में भेरूसिंह और प्रेमसिंह पिता भंवरजी के खेतों में नरवाई जलती पाई गई। इसके लिए उन्हें 5,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा देना पड़ा।

इसी तरह ग्राम जटामढ़ी के कन्हैयालाल पिता शिवनारायण दांगी पर 2,500 रुपये, पानखेड़ी के बापूलाल सौंधिया पर 5,000 रुपये, और बरूखेड़ी के बबली पिता घनश्याम पर 2,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

Rajgarh News: भोजपुर और माचलपुर तहसील की भी कार्रवाई

तहसील भोजपुर में भी नरवाई जलाने की घटनाएं सामने आईं। ग्राम ढाबला की राधाबाई बेवा बहादुरसिंह और धनराजसिंह पिता बहादुरसिंह पर 2,500-2,500 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया।

वहीं तहसील माचलपुर के अंतर्गत ग्राम लसूडल्या में हनुमानप्रसाद पिता बिहारीलाल को भी 5,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा भरना पड़ा। इन कार्रवाइयों को तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों की टीमों ने मौके पर पहुँचकर अंजाम दिया।

Rajgarh News: कानून का उल्लंघन और पर्यावरण का नुकसान

प्रशासन द्वारा यह सख्त कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत की गई है। यह धारा उन गतिविधियों को नियंत्रित करती है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। खेतों में नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, और कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोतरी होती है। साथ ही यह आसपास के लोगों की सेहत के लिए भी खतरा बन जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नरवाई जलाने से निकलने वाला धुंआ श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और लंबे समय तक इसका प्रभाव वातावरण में बना रहता है। इससे आसपास के गांवों में सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, और फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

प्रशासन ने किसानों को दी चेतावनी

तहसीलदारों ने स्पष्ट किया है कि आगे भी अगर कोई किसान नरवाई जलाते पाया गया, तो उसे अधिक जुर्माना और कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है। साथ ही, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए किसानों को वैकल्पिक उपायों जैसे मल्चर, रोटावेटर, और जैविक खाद निर्माण की विधियों को अपनाने की सलाह दी गई है।

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने बताया कि "हम लगातार किसानों को जागरूक कर रहे हैं। मगर इसके बावजूद कुछ किसान नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

  • क्या है नरवाई जलाने का विकल्प?
  • नरवाई (पराली) जलाने से बचने के लिए सरकार और कृषि विभाग ने कई वैकल्पिक तकनीकों और योजनाओं की शुरुआत की है:
  • मल्चर और सुपर सीडर जैसी मशीनें खेत में ही नरवाई को नष्ट कर देती हैं।
  • पराली से बायोगैस, जैविक खाद और ऊर्जा उत्पादन के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • किसानों को सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं।

चेतावनी और सीख

राजगढ़ प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई सिर्फ दंड नहीं, एक चेतावनी है कि पर्यावरण से खिलवाड़ को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह संदेश भी कि सरकार किसानों के हित में है, बशर्ते वे कानून और पर्यावरण दोनों का सम्मान करें।

यदि इसी तरह कानून का पालन, जागरूकता और वैकल्पिक तकनीक को अपनाया जाए, तो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कृषि की स्थिरता भी सुनिश्चित की जा सकती है।

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