पन्ना में एक ईंट भट्टा कामगार को मिला 'दुर्लभ' हीरा, किस्मत चमकी, जानिए कितने की लगी बोली
पन्ना, 27 फरवरी: मध्य प्रदेश के पन्ना शहर की पहचान 'डायमंड सिटी' के रूप में बनी हुई है। वहां स्थानीय खदानों से हीरे मिलना कोई अजूबे की बात नहीं है। लेकिन, जब किसी के हाथ दुर्लभ हीरा लग जाए तो झटके में वह शख्स करोड़पति बन जाता है। स्थानीय ईंट भट्टा में काम करने वाले एक बहुत ही सामान्य से शख्स की किस्मत भी एक हीरे की वजह से चमक गई है। पिछले 21 फरवरी को उनके हाथ जो हीरा लगा था, वह वजन की वजह से दुर्लभ श्रेणी में आता है। फिर क्या था। उसे खरीदने के लिए देशभर के हीरा कारोबारियों की लाइन लग गई और जब सबसे ऊंची बोली लगी तो नीलामी स्थल पर मौजूद सारे लोग भौंचक्के रह गए।

ईंट भट्टा के कामगार को मिला था 26.11 कैरेट का हीरा
मध्य प्रदेश में डायमंड सिटी के नाम से मशहूर पन्ना में एक शख्स की किस्मत ने जबर्दस्त पटली मारी है। ईंट भट्टा चलाने वाले सुशील शुक्ला नाम के एक शख्स को एक हीरा इसी महीने के 21 फरवरी को उस जमीन से मिला था, जिसे उन्होंने सरकार से पट्टे पर ले रखी है। इस हीरे का वजन 26.11 कैरेट है। मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने बताया है कि 24 फरवरी को राजधानी भोपाल से 380 किलोमीटर दूर पन्ना शहर में कुल 88 हीरों की बोली लगी, जिसमें सुशील शुक्ला को मिला हीरा सबसे महंगा बिका है। नीलामी के दौरान उस दिन बाकी 87 हीरों की नीलामी कुल 1.89 करोड़ रुपये में हुई। शुक्ला पन्ना शहर के किशोर गंज इलाके के रहने वाले हैं।

नीलामी में पूरे देश के हीरा कारोबारी शामिल हुए
रविवार को पन्ना के जिलाधिकारी संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि नीलामी के पहले दिन सामूहिक रूप से 82.45 कैरेट वजन वाले 36 हीरे 1.65 करोड़ रुपये में बेचे गए। जबकि, दूसरे दिन 78.35 कैरेट वजन के 52 हीरे 1.86 करोड़ रुपये में बिके। उनके मुताबिक नीलामी के दौरान इस बेशकीमती पत्थर की बोली 3 लाख रुपये प्रति कैरेट से शुरू होकर 6.22 कैरेट प्रति कैरेट तक गई। 26.11 कैरेट वाले सबसे बड़े हीरे के बारे में वो बोले कि इतना बड़ा हीरा काफी समय बाद पन्ना में पाया गया है। खुली नीलामी की इस प्रक्रिया में मुंबई, सूरत, राजस्थान और मध्य प्रदेश से बड़े हीरा कारोबारी पहुंचे हुए थे।

20 साल से हीरे की तलाश में लगे थे सुशील शुक्ला
47 साल के सुशील शुक्ला ने हीरे की तलाश की यात्रा 20 साल पहले शुरू की थी। उन्होंने हीरा मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए हाल ही में गांव कनेक्शन इंग्लिश से कहा था, 'मैं 20 साल से अपनी किस्मत आजमा रहा हूं। लेकिन, 21 फरवरी को मेरी किस्मत चमक गई।' दरअसल, हीरे की तलाश में हजारों लोग सरकार से 10 फीट बाय 10 फीट की जमीन का पट्टा 200 रुपये सालाना पर लेते हैं और अपनी किस्मत के हीरे के लिए खुदाई शुरू कर देते हैं।

1.62 करोड़ रुपये में बिका 26.11 कैरेट वाला हीरा
जैसी की उम्मीद थी कि 21 फरवरी को पन्ना के एक खदान से मिले 26.11 कैरेट वाले हीरे की बोली सबसे ऊंची लगी है और यह 1.62 करोड़ रुपये में बिका है। छोटे से ईंट भट्टा में काम करने वाले सुशील शुक्ला को यह हीरा स्थानीय कृष्णा कल्याणपुर इलाके में जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर उथले खदान में मिला था। सरकार की रॉयल्टी और टैक्स काटने के बाद इससे प्राप्त रकम उन्हें दे दी जाएगी। रॉयल्टी के तौर पर सरकार कुल रकम का 11.5 फीसदी लेती है। जानकारी के मुताबिक इस हीरे की सबसे ज्यादा बोली हीरा कारोबारी ब्रिजेश जादिया ने लगाई है, जिनकी कंपनी 'मदर जेम्स एंड कंपनी' हीरे के व्यवसाय से जुड़ी है।

इसे 'दुर्लभ' हीरा क्यों माना जा रहा है ?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक पन्ना जिले की खदानों में करीब 12 लाख कैरेट हीरा होने का अनुमान है। लेकिन, कुछ ही लोग शुक्ला जैसे सौभाग्यशाली रहे हैं, जिन्हें इतना बेशकीमती पत्थर मिला है। पन्ना के हीरा खदान कार्यालय के एक पदाधिकारी रवि पटेल के अनुसार, 'रिकॉर्ड से पता चलता है कि सबसे बड़ा हीरा 1961 में रसूल मोहम्मद नाम के शख्स को मिला था। उन्हें 44.33 कैरेट का हीरा मिला था और यह रिकॉर्ड आज भी कायम है।' 25 कैरेट से ज्यादा का हीरा दुर्लभ और अनमोल माना जाता है। पटेल ने शुक्ला को मिले हीरे के बारे में बताया है कि 'यह खास हीरा 11वां सबसे बड़ा है।' (तस्वीरें- सांकेतिक)












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