MP News: मध्यप्रदेश की सरकार में कर्मचारियों की सुस्ती, CM मॉनिट के आदेशों की अनुपालना में ढिलाई पर होगा एक्शन
MP News: मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार में अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों की सुस्ती से आम जनता परेशान हो रही है। मुख्यमंत्री द्वारा जारी आदेशों और योजनाओं के बावजूद विभागों में काम की गति धीमी हो गई है, और अधिकारी व कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े हुए हैं।
खासकर स्वास्थ्य विभाग में तो कई मामलों में फाइलें गायब हो जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस कारण योजनाओं और प्राथमिक कार्यों का निष्पादन समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे जनता को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सीएम मॉनिट और ए प्लस फाइल की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री कार्यालय की सीएम मॉनिट (मुख्यमंत्री मॉनिटरिंग) प्रक्रिया प्राथमिक फाइलों और घोषणाओं के निपटारे की निगरानी करती है। इस प्रक्रिया में ए प्लस फाइल अत्यधिक प्राथमिकता वाली होती है, जिन्हें 24 घंटे से 5 दिनों के अंदर निपटाना होता है। वहीं, ए फाइल को 15 दिनों के अंदर निपटाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त भी फाइल होती है, जो विधायक, सांसदों या मंत्रियों की सिफारिशों पर आधारित होती हैं।
हालांकि, इन प्रक्रियाओं के बावजूद निचले स्तर के कर्मचारियों की मनमानी से कई फाइलों का निपटारा नहीं हो रहा है। बी मोनिट की फाइलों का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा है, जिससे जनहित में कार्यों में देरी हो रही है।
मुख्यमंत्री और अधिकारियों की नाराजगी
इस स्थिति पर मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, राजेश राजौरा ने नाराजगी जताई है। वह इस बात से खफा हैं कि विभागों द्वारा काम नहीं किया जा रहा और जनप्रतिनिधि तक को समय पर उत्तर नहीं मिल रहे।
जनप्रतिनिधियों की शिकायतें
पशुपालन राज्य मंत्री लखन पटेल ने पथरिया में नहर निर्माण, नर्मदा सुनार कोपा लिंक परियोजना की स्वीकृति और मध्यम लघु सिंचाई परियोजना की स्वीकृति के लिए पत्र लिखा था, लेकिन इस मामले में निचले स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही उत्तर भेजा गया। इसी तरह, विधायक निर्मला सप्रे ने जल उपलब्धता के मुद्दे पर मांग पत्र भेजा था, लेकिन इसका भी कोई उत्तर नहीं आया।
पूर्व मंत्री और विधायक जयंत मलैया ने सेवानिवृत्त उपयंत्री वीएस गांधी के लिए निर्वाह, पेंशन, भविष्य निधि भुगतान की मांग की थी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी इसका कोई उत्तर नहीं आया। विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी ने ग्राम सलैया खुर्द के मुआवजे में वृद्धि के लिए प्रस्ताव दिया था, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं आया।
लंबित आवेदन और कार्रवाई की कमी
टीकमगढ़ में डॉ काशी प्रसाद त्रिपाठी ने पिछले साल धसान नदी पर बांध बनाने के लिए आवेदन किया था, और यह मामला सीएम मॉनिट में आया था, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी तरह दमोह विधायक रामसिया भारती ने बड़ा मल्हा में सिंचाई तालाब के निर्माण के लिए आवेदन दिया था, लेकिन विभाग ने अभी तक इसका कोई उत्तर नहीं भेजा है।
क्या कर रहे हैं अधिकारी?
आश्चर्यजनक बात यह है कि, जहां जनप्रतिनिधि सीधे मुख्यमंत्री मोनिट में मामलों की शिकायत कर रहे हैं, वहीं निचले स्तर के कर्मचारी काम करने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं और ना ही जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं। इससे मुख्यमंत्री के आदेशों का असर आम जनता पर नहीं दिख रहा है और योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा।












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