Bhopal News: BJP का वादा, कला धन की जगह पीला धन: राजेश शर्मा को लेकर कांग्रेस ने इकबाल सिंह बैस पर लगाए आरोप

MP News: भोपाल में आयकर और लोकायुक्त की संयुक्त छापेमारी ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने त्रिशूल कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक राजेश शर्मा के घर हुई छापेमारी के बाद पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

कांग्रेस उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने राजेश शर्मा को मात्र "एक छोटी सी मछली" बताया और कहा कि इस पूरे मामले के पीछे असली मास्टरमाइंड इकबाल सिंह बैस हैं।

bhopal Congress Hemant Katare accuses Ias Iqbal Singh Bais of corruption and Rajesh Sharma

उन्होंने कहा, "राजेश शर्मा तो केवल एक छोटी मछली है, असल में इस पूरे खेल के पीछे इकबाल सिंह बैस हैं।" कटारे ने इसे एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए कहा कि यदि इकबाल सिंह बैस और उनके करीबी अधिकारियों की जांच हो, तो यह राशि कम से कम 20 हजार करोड़ रुपए तक जा सकती है।

राजेश शर्मा का कनेक्शन

हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि राजेश शर्मा को इकबाल सिंह बैस का "पपेट" बताया और कहा कि राजेश शर्मा की कंपनी कुणाल बिल्डर्स से छापेमारी के दौरान प्राप्त संपत्तियों का कनेक्शन सीधे तौर पर बैस और उनके परिवार से जुड़ा हुआ है। कटारे ने यह भी खुलासा किया कि बैस और उनके परिवार ने सेवनिया गौड़ इलाके में जमीन खरीदी थी, जो कुणाल बिल्डर्स द्वारा दी गई थी।

इकबाल सिंह बैस पर भ्रष्टाचार के आरोप

कटारे ने पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने अपने करीबी लोगों को कई सरकारी सुविधाएं और परमिशन दिलवायीं। कटारे ने दावा किया कि बैस के न केवल व्यक्तिगत फायदे के लिए फैसले किए गए, बल्कि उन्होंने परिवहन मंत्रालय में रहते हुए भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया।

कटारे के अनुसार, राजेश शर्मा से जब्त की गई संपत्ति केवल 100 करोड़ रुपए की है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर बड़े अधिकारियों और नेताओं की जांच की जाए, तो यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है, और यह 20 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

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वायदा काला धन लाने का था, लेकिन पीला धन लेकर आ गई सरकार: सवालों की झड़ी

हेमंत कटारे ने आरोप लगाते हुए कहा किभाजपा सरकार ने हमेशा "कला धन" (काले धन) वापस लाने का वादा किया था, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि इस सरकार ने "पीला धन" (सोने) के रूप में भ्रष्टाचार की असलियत सामने ला दी है।

इस संदर्भ में कांग्रेस और विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि यह केवल एक झांसा था। प्रदेश के कई भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के बीच कई और गंभीर सवाल भी उठाए जा रहे हैं:

1. दूसरा सौरभ कौन है?

सौरभ शर्मा का मामला तो अब खुलासा हो गया है, लेकिन सवाल उठता है कि वर्तमान में व्यवस्था को चलाने वाला दूसरा सौरभ कौन है? इस सवाल का जवाब कब मिलेगा? क्या यह वही व्यक्ति है जो सौरभ शर्मा के जरिए प्रदेश में चल रहे भ्रष्टाचार में लिप्त था, या फिर कोई और इसका मास्टरमाइंड है?

2. परिवहन मंत्री और स्टाफ की संलिप्तता की जांच?

आरोप है कि वर्तमान परिवहन मंत्री और उनके स्टाफ की संलिप्तता भी इस पूरे प्रकरण में हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों का नाम भी सामने आ रहा है, जो कुछ परिवहन नाकों को गौरव पाराशर और हेमंत जाटव के नाम से चला रहे हैं। क्या इनकी भूमिका की जांच की जाएगी?

3. तुभराम और बघेल की भूमिका?

परिवहन विभाग में तुभराम और बघेल जैसे कर्मचारियों की भूमिका भी संदेहास्पद मानी जा रही है। इनसे जुड़ी प्रॉपर्टी राजसात करने की कार्रवाई पहले हो चुकी है, लेकिन अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। क्या इसके पीछे कोई बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की रंजिश छिपी हुई है?

4. असली मगरमच्छों का खुलासा कब होगा?

सौरभ शर्मा को तो एक छोटी मछली कहा जा रहा है, लेकिन असली मगरमच्छों का खुलासा कब होगा? ये उन बड़े नेताओं और अधिकारियों का नाम है, जिनके संरक्षण में यह काम हो रहा था। क्या सरकार इन लोगों के नाम सामने लाने की हिम्मत दिखाएगी?

5. 52 किलोग्राम सोना और वाहन की संदिग्ध यात्रा

लोकायुक्त की कार्रवाई में 52 किलो सोना की बरामदगी हुई, लेकिन सवाल यह है कि यह सोना वाहन में कैसे रखा गया और कैसे वह वाहन शहर की गलियों से होकर सुनसान फार्महाउस तक पहुंचा? इस दौरान सीसीटीवी फुटेज की जांच की जानी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की ईमानदारी पर कोई सवाल तो नहीं उठता।

6. पूर्व और वर्तमान मंत्री और उनके परिजनों की संपत्ति की जांच

क्या पूर्व और वर्तमान मंत्री और उनके परिवारों की संपत्ति की जांच शुरू होगी? क्या यह मामले सिर्फ़ छोटे अधिकारियों तक सीमित रहेंगे, या फिर बड़े नेताओं और उनके रिश्तेदारों की संपत्तियों को भी जांच के दायरे में लिया जाएगा?

7. सौरभ शर्मा ने कैसे अर्जित की इतनी संपत्ति?

सौरभ शर्मा ने अपनी नौकरी के सिर्फ साढ़े छह सालों में कई सौ करोड़ की संपत्ति भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित की। यदि सौरभ के नाकों से इस तरह की संपत्ति आई है, तो क्या आरटीआई और अन्य अधिकारियों द्वारा अर्जित संपत्तियों की जांच होगी?

8. पूर्व व्यवस्था और उस पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति

सौरभ शर्मा के विभाग में आने से पहले यह व्यवस्था किसके हाथ में थी? क्या उस व्यक्ति की संपत्ति की भी जांच की जाएगी?

9. काली कमाई के नेटवर्क में सौरभ की भूमिका

क्या सौरभ शर्मा के पास सिर्फ अपनी काली कमाई थी, या फिर राजनेताओं, अधिकारियों, और काली कमाई का कारोबार करने वाले धन्नासेठों की संपत्तियां उसके माध्यम से दुबई जैसे देशों में अवैध रूप से निवेश की गई थीं?

10. विदेश यात्राओं और बच्चों की शिक्षा की जांच

केन्द्रीय विमानन मंत्रालय से जानकारी एकत्रित की जानी चाहिए कि परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कितनी बार विदेश यात्राएं कीं और कितनी बार उन्होंने विभाग से अनुमति ली? उनके पास यह पैसा कहां से आया? इसके साथ ही, क्या विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चे विदेशों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं?

11. परिवहन निरीक्षकों की स्थिति

परिवहन निरीक्षक विभाग में 2011 के बाद से अन्य विभागों की तरह उच्च पदों पर पदनाम या पदोन्नति क्यों नहीं दी गई? क्यों ये परिवहन निरीक्षक उप परिवहन अधिकारी बनने के लिए तैयार नहीं हैं?

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