MP News: भिंड में सरकारी अधिकारी की नौकरी पर संकट, तीसरे बच्चे की जानकारी छुपाई, सरकार ने थमाया नोटिस
MP News: मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक सरकारी डॉक्टर की नौकरी पर तलवार लटक गई है। लहर सिविल अस्पताल में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ विजय कुमार शर्मा ने अपनी तीसरी संतान की जानकारी छुपाकर 9 साल से नौकरी की, लेकिन अब यह राज खुल गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें नोटिस थमाकर जवाब माँगा है, और उनकी विभागीय जाँच भी शुरू कर दी गई है। यह मामला तब सामने आया, जब स्थानीय विधायक ने इसकी शिकायत की। अब सवाल यह है कि क्या डॉ. शर्मा अपनी नौकरी बचा पाएँगे, या फिर नियम तोड़ने की सजा उन्हें भुगतनी पड़ेगी? यह मामला भिंड में चर्चा का विषय बन गया है, और सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी भी साबित हो सकता है।

तीसरे बच्चे की जानकारी छुपाई: 9 साल से नौकरी कर रहे डॉ शर्मा
डॉ विजय कुमार शर्मा भिंड के लहर सिविल अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उनकी तीन संतानें हैं, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ है। मध्यप्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की तीसरी संतान 26 जनवरी 2001 के बाद पैदा होती है, तो उसे शासकीय नौकरी में नियुक्ति का हक नहीं है। लेकिन डॉ. शर्मा ने इस जानकारी को शासन से छुपाकर पिछले 9 साल से नौकरी की।
यह मामला तब सामने आया, जब भिंड के विधायक देवेंद्र रामनारायण सखवार ने इसकी शिकायत की। विधायक ने स्वास्थ्य विभाग और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से इस मामले में कार्रवाई की माँग की थी। विधायक की शिकायत के बाद स्वास्थ्य संचालनालय ने तुरंत एक्शन लिया और 19 दिसंबर 2024 को डॉ. शर्मा को नोटिस जारी कर आरोप-पत्र सौंपा। इसके बाद मार्च 2025 में उनकी विभागीय जाँच शुरू कर दी गई।
नोटिस में सख्त सवाल: "नौकरी क्यों न छीनी जाए?"
स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर शर्मा को जारी नोटिस में सख्त सवाल पूछे हैं। नोटिस में कहा गया, "शासकीय सेवा में रहते हुए या शासकीय सेवा में आने के बाद, यदि 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान पैदा होती है, तो ऐसे व्यक्तियों को शासकीय नौकरी में नियुक्ति का प्रावधान नहीं है। आपने यह जानकारी शासन से छुपाकर 9 साल से शासकीय सेवा की है। मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के उल्लंघन के लिए आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए?" विभाग ने डॉ. शर्मा से इस आरोप-पत्र पर जवाब माँगा है।
साथ ही, उनकी नियुक्ति की जांच भी शुरू कर दी गई है। भिंड कलेक्टर ने 10 जनवरी 2024 को चिकित्सा अधिकारियों की वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए डॉ. शर्मा को लहर सिविल अस्पताल का प्रभारी चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया था। लेकिन अब उनकी नियुक्ति की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विधायक की शिकायत से शुरू हुआ बवाल
यह पूरा मामला तब गरमाया, जब भिंड के विधायक देवेंद्र रामनारायण सखवार ने डॉ. शर्मा की नियुक्ति पर सवाल उठाए। विधायक ने स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की जाँच करने और कार्रवाई की जानकारी देने की माँग की थी। उन्होंने इस मुद्दे को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के सामने भी उठाया, जो स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी मंत्री भी हैं। विधायक की शिकायत के बाद स्वास्थ्य संचालनालय ने तुरंत जाँच शुरू की और डॉ. शर्मा को नोटिस जारी किया।
सूत्रों के मुताबिक, विधायक को स्थानीय लोगों ने इस मामले की जानकारी दी थी। एक स्थानीय निवासी ने बताया, "डॉ. शर्मा की तीसरी संतान के बारे में गांव में कई लोगों को पता था। यह बात विधायक तक पहुँची, और उन्होंने इसकी शिकायत की।" इस शिकायत ने डॉ शर्मा की नौकरी पर संकट खड़ा कर दिया है।
विभागीय जांच शुरू: नौकरी पर लटकी तलवार
स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। 19 दिसंबर 2024 को नोटिस जारी करने के बाद मार्च 2025 में डॉ शर्मा की विभागीय जाँच शुरू कर दी गई। जाँच में यह देखा जाएगा कि क्या उनकी नियुक्ति नियमों के अनुसार हुई थी, और क्या उन्होंने जानबूझकर तीसरे बच्चे की जानकारी छुपाई। जाँच पूरी होने के बाद प्रतिवेदन के आधार पर उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "अगर जाँच में यह साबित हो जाता है कि डॉ. शर्मा ने जानबूझकर जानकारी छुपाई, तो उनकी नौकरी जाना तय है। नियम बहुत सख्त हैं, और इस तरह की गलती को बख्शा नहीं जा सकता।"
मध्य प्रदेश में तीसरे बच्चे का नियम: क्या कहता है कानून?
मध्यप्रदेश में 26 जनवरी 2001 को एक नियम लागू किया गया था, जिसके तहत अगर किसी व्यक्ति की तीसरी संतान इस तारीख के बाद पैदा होती है, तो उसे शासकीय नौकरी में नियुक्ति का हक नहीं है। यह नियम जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था। इस नियम का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें नौकरी से बर्खास्तगी तक शामिल है।
हालांकि, इस नियम को लेकर कई बार विवाद भी हो चुके हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह नियम आज के समय में प्रासंगिक नहीं है, और इसे खत्म करना चाहिए। लेकिन सरकार ने इस नियम को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है, ताकि सरकारी कर्मचारियों में अनुशासन बना रहे।
सोशल मीडिया पर चर्चा: "नियम तोड़ने की सजा मिलनी चाहिए!"
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। एक यूजर ने लिखा, "नियम तोड़ने की सजा मिलनी चाहिए। अगर डॉ. शर्मा ने जानबूझकर जानकारी छुपाई, तो उनकी नौकरी जानी चाहिए।" वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, "यह नियम बहुत पुराना हो गया है। सरकार को इसे खत्म करना चाहिए। लेकिन अगर नियम है, तो उसका पालन करना चाहिए।" कुछ लोगों ने डॉ. शर्मा का बचाव करते हुए कहा, "हो सकता है कि उन्हें इस नियम की पूरी जानकारी न हो। सरकार को उन्हें माफ करना चाहिए।"
एक सवाल: क्या यह नियम आज भी प्रासंगिक है?
डॉ विजय शर्मा का यह मामला कई सवाल खड़े करता है। पहला सवाल यह कि क्या 2001 का यह नियम आज भी प्रासंगिक है? जनसंख्या नियंत्रण के लिए यह नियम उस समय जरूरी था, लेकिन अब जब देश में जन्मदर पहले से कम हो गई है, तो क्या इस नियम को खत्म करने का समय आ गया है? दूसरा सवाल यह कि क्या डॉ शर्मा को इस नियम की जानकारी थी, और उन्होंने जानबूझकर इसे छुपाया? और तीसरा सवाल यह कि क्या इस मामले में सख्त कार्रवाई से अन्य सरकारी कर्मचारियों में डर का माहौल बनेगा?
यह मामला भिंड में चर्चा का विषय बन गया है। लहर सिविल अस्पताल में मरीजों के बीच भी इसकी खूब चर्चा हो रही है। एक मरीज ने कहा, "डॉ. शर्मा बहुत अच्छे डॉक्टर हैं। लेकिन अगर उन्होंने गलती की है, तो सजा तो मिलनी चाहिए।" वहीं, एक अन्य मरीज ने कहा, "यह नियम बहुत सख्त है। सरकार को इसे बदलना चाहिए।"
नौकरी बचेगी या जाएगी?
डॉ विजय शर्मा की नौकरी अब जाँच के नतीजों पर टिकी है। अगर जाँच में उनकी गलती साबित होती है, तो उनकी नौकरी जाना तय है। लेकिन अगर वे यह साबित कर पाए कि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी, तो शायद उन्हें राहत मिल सकती है। यह मामला न सिर्फ डॉ. शर्मा के लिए एक सबक है, बल्कि उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी है, जो नियमों का पालन नहीं करते।
अब देखना यह है कि जाँच का नतीजा क्या आता है, और क्या डॉ. शर्मा अपनी नौकरी बचा पाते हैं। यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है-आने वाले दिनों में इसकी नई कड़ी सामने आएगी। लेकिन यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि क्या सरकारी नियमों को समय के साथ बदलने की जरूरत है, या फिर सख्ती ही इसका जवाब है? इसका जवाब भविष्य में मिलेगा।












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