माता रानी के दरबार मे अनोखा पत्थर है जिसको बजाने पर निकलती है घंटी की आवाज
रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में माता रानी के दरबार में एक अनोखा पत्थर है, जिसको बजाने पर घंटी की आवाज निकलती है। नवरात्र में देवी मां के नौ रूपों के आराधना की पूजा की जाती है। माँ के कई प्राचीन मंदिर व दुर्लभ स्थानों पर विराजमान हैं। कुछ जगह ऐसी भी हैं, जहां के बारे में कुछ ही लोगों को जानकारी है। ऐसी ही एक जगह है मध्य प्रदेश के रतलाम के बेरछा गांव के पास। यहां प्राचीन पहाड़ी पर अंबे माता का मंदिर है। इस पहाड़ी पर मंदिर से कुछ ही दूरी पर एक अनोखा पत्थर भी है। इस पत्थर पर अन्य किसी पत्थर के टकराने से धातु की तरह आवाज आती है। यह आवाज मंदिर के घंटी की तरह सुनाई देती है, जिसे ग्रामीण चमत्कारी पत्थर मानते हैं। हालांकि वन इंडिया हिंदी इस तरह किसी चमत्कार की पुष्ठि नहीं करता है।

कहां पर स्थित है मंदिर
मंदिर रतलाम से 35 किलोमीटर दूर गांव बेरछा में है। इस गांव के पास है एक पहाड़ी, जिसे इस जिले की सबसे ऊंची पहाड़ी भी कहते हैं। यहां पर माँ अम्बे का प्राचीन स्थान है। इस मंदिर को काफी समय पहले एक ग्रामीण ने देखा था। तब पहाड़ी पर आने जाने का मार्ग भी नहीं था। इसलिए काफी कम लोग इस जगह के बारे में जानते थे।पहले यहां कुछ ग्रामीण और संत ही यहां आते थे। इनके बाद यहां आने के लिए एक कच्चा सकरा रास्ता ग्रामीणों ने बनाया था ताकि मंदिर तक आवश्यक पूजा व अन्य सामग्री ले जाई जा सके।

मंदिर से थोड़ी दूर पर है पत्थर
बेरछा गांव के प्राचीन अंबे माता मंदिर से थोड़ी ही दूर पर वह विचित्र पत्थर है। जिसे बजाने पर उसमें से धातु की तरह टन टन की आवाज आती है। ये किसी चमत्कार से कम नहीं है। हालांकि यह पूरी पहाड़ी पत्थरों से भरी हुई है, लेकिन उसमें सिर्फ एक ही पत्थर खास है, जो कि धातु की तरह आवाज करता है, इस घंटी या किसी धातु की तरह बजने वाले पत्थर का रहस्य अब तक सुलझाया नहीं जा सका है।

मानते हैं देवी मां का चमत्मकार
इस पत्थर को देवी चमत्कार मान जाता है। हालांकि कुछ लोग इस पत्थर में धातु की मात्रा अधिक होने की बात कहते हैं, लेकिन अगर ऐसा है तो इस इलाके में बिखरे दूसरे पत्थरों से भी ऐसी ही आवाज आनी चाहिए थी। यहां बजने वाला ये पत्थर एक ही है। इस पत्थर को देखने आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

पहले ग्रामीणों को लगता था डर
अब तो ग्रामीणों ने इस पत्थर की पूजा भी शुरू कर दी है और यहां पर एक ध्वज भी लगा दिया गया है। हालांकि इस पहाड़ी पर मंदिर तक लोगों की आवाजाही बड़ी थी, लेकिन इस अनोखे घंटी की तरह बजने वाले पत्थर तक लोग आने से कतराते थे। दिन में कुछ आने भी लगे, लेकिन इस एक अकेले पत्थर के इस तरह की आवाज से रात में ग्रामीणों को भय होने लगा था और इस पत्थर के नजदीक दिन ढलने के बाद लोग डरावनी जगह के भ्रम से आने में कतराने लग गए थे।












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