किस पत्थर के बने हैं उज्जैन के महाकाल, यहां भांग से होता है श्रंगार

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उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण हो रहा है या नहीं इसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी इन दिनों मंदिर के शिवलिंग का परीक्षण कर रही है। विशेषज्ञों की टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि महाकाल शिवलिंग कौन से पत्थर का है तथा इसका तापमान कितना है।पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने मंगलवार को गर्भगृह में एक घंटे रहकर शिवलिंग पर मशीन लगा कर इसकी जांच की। आपको बता दें कि उज्जैन में स्थित शिवलिंग दुनिया का इकलौता शिवलिंग है जिसका श्रंगार भांग से किया जाता है।

छिद्रों में जम रहा है दही-दूध

छिद्रों में जम रहा है दही-दूध

सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल शिवलिंग का क्षरण होने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान जांच के लिए जीएसआई के चार विशेषज्ञों की टीम को विभिन्न बिंदुओं से सर्वे कर चार हफ्तों में रिपोर्ट देने को कहा है। 7 सितंबर को पहली बार टीम के चारों लोगों ने महाकाल पहुंचकर शिवलिंग को नापा, छिद्रों में जम रहे दही-दूध के सेंपल लिए।

दूसरी बार 11 सितंबर को जीएसआई भोपाल व अन्य शहरों के जल विशेषज्ञों की टीम ने गर्भगृह में महाकाल को चढ़ने वाले जल, कोटितीर्थ कुंड और रुद्रसागर के पानी का सेंपल लिया। मंगलवार को फिर एक ओर टीम जांच के लिए पहुंची। जीएसआई के जल विशेषज्ञों की जिस टीम ने सोमवार को मंदिर के अंदर कोटितीर्थ कुंड, गर्भगृह में शिवलिंग पर चढ़ने वाले व रुद्रसागर के पानी के सैंपल की महाकाल धर्मशाला के कमरों में रातभर जांच की।

क्यों खास है उज्जैन का शिवलिंग

क्यों खास है उज्जैन का शिवलिंग

देशभऱ स्थित शिवलिंगों पर सामान्यता भांग का अभिषेक होता है जबकि उज्जैन के महाकाल का श्रंगार पूर्णतया भांग से किया जाता है। इस श्रंगार में लगभग तीन घंटे का समय लगता है। पहले खास मौकों पर ही महाकाल का भांग से श्रृंगार होता था लेकिन डेढ़ दशक में भक्त मनोकामना पूरी होने पर भी भांग से श्रृंगार कराने लगे। आपको बता दें कि श्रावण-भादौ मास में प्रतिदिन संध्या आरती में यह श्रृंगार होता है। इस भांग को बाद में प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है। मंदिर के लिए भांग उज्जैन का महेश्वरी परिवार करता है। यह परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से इस काम को कर रहा है। उज्जैन के राजा महा शिवकाल का पर्व विशेष पर विविध श्रृंगार किया जाता है। जन्माष्टमी पर कृष्ण श्रृंगार, नागपंचमी पर शेषनाग रूप, गणेष चतुर्थी पर गजानन रूप में सजाया जाता है।

ऐसे तैयार होती है श्रंगार की भांग

ऐसे तैयार होती है श्रंगार की भांग

जिस दिन श्रृंगार होता है, उसी दिन भांग तैयार की जाती है। पहले भांग की सूखी पत्तियों को पानी में उबाला जाता है फिर ठंडा कर पत्तियों को पत्थर पर पीसा जाता है। एक बार के श्रृंगार में करीब पांच किलो भांग की आवश्यकता होती है। पत्तियां एक्साइज विभाग के माध्यम से 100 रुपए प्रति किलो खरीदी जाती हैं। तैयार भांग का दाम 500 रुपए प्रति किलो होता है। एक बार के श्रृंगार के लिए भक्त से नौ हजार रुपए शुल्क लिया जाता है। संध्या आरती में किया गया भांग का श्रृंगार अगले दिन तड़के भस्मारती से पहले उतारा जाता है। लेपन तैयार करने की शुरुआती प्रक्रिया में करीब तीन घंटे लगते हैं।

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English summary
archaeologists examine reasons for ujjain Mahakaleshwar Jyotirlingam erosion
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