MP News: गुना में दर्दनाक हादसा, जानिए कैेसे कुएं ने ली 5 लोगों की जान, बछड़े को बचाने की कोशिश में हुई घटना
Accident in Guna MP News: मध्य प्रदेश के गुना जिले के धरनावदा गांव में मंगलवार सुबह एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। एक बछड़े को बचाने के लिए कुएं में उतरे छह लोगों में से पांच की जहरीली गैस के रिसाव के कारण दम घुटने से मौत हो गई।
इस हादसे ने न केवल स्थानीय समुदाय को स्तब्ध कर दिया, बल्कि यह भी दर्शाया कि छोटी सी भलाई की कोशिश कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। रेस्क्यू ऑपरेशन में प्रशासन और गेल इंडिया की CISF यूनिट ने खटिया और रस्सी के सहारे शवों को बाहर निकाला, लेकिन एक जीवित बचे व्यक्ति की कहानी ने इस त्रासदी को और मार्मिक बना दिया।

धरनावदा में हादसा, क्या हुआ?
घटना मंगलवार, 24 जून 2025 को सुबह करीब 10 बजे गुना जिले के धरनावदा गांव में हुई। गांव के एक कुएं में एक बछड़ा गिर गया था, जिसे बचाने के लिए छह लोग एक-एक करके कुएं में उतरे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सबसे पहले एक व्यक्ति ने बछड़े को बचाने की कोशिश की, लेकिन वह बाहर नहीं निकल पाया। उसे बचाने के लिए एक के बाद एक पांच अन्य लोग कुएं में उतरे। दुखद यह रहा कि इनमें से पांच लोगों की जहरीली गैस के रिसाव के कारण दम घुटने से मौत हो गई। केवल एक युवक, जो शुरुआत में ही कुएं से बाहर आ गया था, इस हादसे में बच पाया।
मृतकों की पहचान निम्नलिखित है:
- रामवीर धाकड़ (35 वर्ष)
- शिवलाल धाकड़ (40 वर्ष)
- महेंद्र धाकड़ (32 वर्ष)
- रामबाबू धाकड़ (28 वर्ष)
- श्याम धाकड़ (30 वर्ष)
बचे हुए व्यक्ति का नाम गोविंद धाकड़ (25 वर्ष) बताया गया, जो हादसे से पहले कुएं से बाहर निकल आया था। गोविंद ने बताया, "मैंने बछड़े को निकालने की कोशिश की, लेकिन कुएं में सांस लेना मुश्किल हो रहा था। मुझे चक्कर आने लगे, और मैं किसी तरह बाहर निकल आया।"
जहरीली गैस का रिसाव, संभावित कारण
गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि कुएं में संभवतः कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का रिसाव हुआ था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा, "हमने गैस के नमूने लैब टेस्ट के लिए भेजे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कौन सी गैस थी और इसका रिसाव कैसे हुआ।" प्रारंभिक जांच में पता चला कि कुआं काफी पुराना और गहरा था, जिसके कारण उसमें हवा की कमी और जहरीली गैस का जमाव हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने कुओं में कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन, या हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं, खासकर अगर कुआं लंबे समय से बंद हो या उसमें जैविक पदार्थ सड़ रहे हों। ऐसी गैसें सांस लेने पर तुरंत बेहोशी और मृत्यु का कारण बन सकती हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन, खटिया और रस्सी से निकाले गए शव
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल, पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी, गेल इंडिया की CISF यूनिट, और मध्य प्रदेश राज्य आपदा मोचन बल (SDERF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू ऑपरेशन में ऑक्सीजन सिलेंडर और मास्क के साथ टीमें कुएं में उतरीं। कुएं की गहराई और सीमित जगह के कारण शवों को निकालना चुनौतीपूर्ण था।
SDERF की टीम ने खटिया और रस्सी का उपयोग करके पांचों शवों और बछड़े को बाहर निकाला। एक रेस्क्यू कर्मी ने बताया, "कुआं बहुत गहरा था, और गैस का खतरा बना हुआ था। हमने ऑक्सीजन मास्क के साथ सावधानीपूर्वक काम किया।" रेस्क्यू ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक चला, और दोपहर 1 बजे तक सभी शवों को बाहर निकाल लिया गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया: राहत और जांच
हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत राहत कार्य शुरू किए। मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता के लिए 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की गई। कलेक्टर कन्याल ने कहा, "हम इस दुखद घटना से बहुत दुखी हैं। मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।"
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कुएं की गैस की जांच के लिए फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है। एसपी अंकित सोनी ने बताया, "हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कुएं में गैस का रिसाव कैसे हुआ। आसपास के अन्य कुओं की भी जांच की जाएगी।"
स्थानीय समुदाय में शोक की लहर
धरनावदा गांव में इस हादसे ने शोक की लहर दौड़ा दी है। मृतक सभी एक ही समुदाय के थे और आपस में रिश्तेदार थे। गांव के सरपंच राम सिंह ने बताया, "ये लोग बछड़े को बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा बैठे। पूरा गांव सदमे में है।" मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है, और स्थानीय लोग इस घटना को एक भयानक त्रासदी बता रहे हैं।
एक स्थानीय निवासी, मंगल सिंह ने कहा, "हमने पहले भी कुएं से जानवर निकाले हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। लोग बिना सोचे-समझे एक-दूसरे को बचाने के लिए कूद गए।" इस हादसे ने ग्रामीणों में कुओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता की जरूरत को उजागर किया है।
मध्य प्रदेश में बारिश और अन्य घटनाएं
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब मध्य प्रदेश भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात से जूझ रहा है। गुना, शिवपुरी, श्योपुर, और अशोकनगर में जलभराव ने जनजीवन को प्रभावित किया है। गुना में ही रेलवे अंडर ब्रिज में पानी भरने से एक ट्रक डूब गया था। इस बीच, धरनावदा हादसे ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।
हाल ही में इंदौर में राजा रघुवंशी हत्याकांड और धार में दहेज प्रताड़ना के एक मामले ने भी सुर्खियां बटोरी थीं। ये घटनाएं मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करती हैं।
पिछले ऐसे हादसे: एक चेतावनी
मध्य प्रदेश में कुओं में गैस रिसाव के कारण होने वाली मौतें कोई नई बात नहीं हैं। 2023 में सीहोर में एक कुएं में गैस रिसाव से तीन लोगों की मौत हो गई थी। 2022 में छतरपुर में भी इसी तरह का हादसा हुआ था, जिसमें चार लोग मारे गए थे। इन घटनाओं ने कुओं की सुरक्षा और गैस रिसाव की जांच की जरूरत上有
मौजूदा हादसे से पहले भी मध्य प्रदेश सरकार ने कुओं में जहरीली गैस से होने वाली मौतों को गंभीरता से लेते हुए कई कदम उठाए हैं। 2023 में 'सुरक्षित कुआं मिशन' शुरू किया गया था, जिसके तहत कुओं की नियमित जांच और सुरक्षा उपकरणों का वितरण किया जाना था। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इस मिशन का प्रभाव सीमित रहा है।
क्या है सबक?
- धरनावदा हादसा कई महत्वपूर्ण सबक देता है:
- सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता: कुओं में उतरने से पहले ऑक्सीजन मास्क और गैस डिटेक्टर जैसे उपकरणों का उपयोग अनिवार्य है।
- जागरूकता अभियान: ग्रामीणों को कुओं में गैस रिसाव के खतरों के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है।
- तेज रेस्क्यू सिस्टम: ग्रामीण क्षेत्रों में त्वरित रेस्क्यू सुविधाओं की कमी को दूर करना होगा।
- नियमित जांच: पुराने और बंद कुओं की नियमित जांच और सफाई जरूरी है।
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के लिए 10 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता की घोषणा की। उन्होंने कहा, "यह एक दुखद घटना है। हम कुओं की सुरक्षा के लिए एक व्यापक नीति तैयार करेंगे।" केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो गुना से सांसद हैं, ने भी इस घटना पर शोक जताया और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
प्रशासन ने गांव में एक जांच समिति गठित की है, जो इस हादसे के कारणों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों की समीक्षा करेगी। साथ ही, SDERF को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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