पीड़ित परिवार का आखिर क्यों नार्को टेस्ट करवाना चाहती है यूपी सरकार, किस बात पर है एसआईटी को शक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चर्चित हाथरस कांड को लेकर पूरे देश में जबरदस्त आक्रोश है। तो वहीं, प्रदेश की योगी सरकार ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश की है। हालांकि, योगी सरकार ने इससे पहले 2 अक्टूबर की रात हाथरस जिले के एसपी, डीएसपी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित करते हुए इस पूरे मामले की नार्को टेस्ट करने की बात कही थी। इतना ही नहीं, उन्होंने पीड़ित परिवार के साथ-साथ आरोपी पक्ष का भी नार्को टेस्ट करवाए जाने की बात कही। लेकिन, शनिवार को पीड़िता की भाभी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह और उनका परिवार नार्को टेस्ट नहीं कराएगा, क्योंकि वह झूठ नहीं बोल रहे हैं।

एसआईटी की पहली जांच रिपोर्ट पर लिया फैसला
बता दें, इस पूरे मामले की एसआईटी जांच चल रही है। एसआईटी टीम ने शुक्रवार को अपनी पहली रिपोर्ट शासन को दी थी। एसआईटी रिपोर्ट मिलने के बाद योगी सरकार ने आरोपियों, पीड़ित परिवार के सदस्यों और पुलिस जांच टीम के सभी कर्मियों का नार्को टेस्ट कराने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि हाथरस गैंगरेप पीड़िता ने उपचार के दौरान विवेचक के सामने कई बार अपने बयान बदले थे। इसका इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर की रिपोर्ट में उल्लेख भी किया गया है। पीड़िता के अलग-अलग तिथियों में लिए गए बयान में विभिन्न बातें सामने आई हैं, इतना ही नहीं, एएमयू की मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हो पाई है।

नार्को टेस्ट से क्या सच आएगा सामने?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस अफसरों का कहना है कि इलाज के दौरान युवती के तीन बार बयान दर्ज हुए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार में युवती ने रेप से जुड़ा कोई बयान नहीं दिया था। उसके बाद 19 सितंबर को दर्ज हुए बयान में कहा कि मेरे साथ छेड़छाड़ हुई है। इसी बयान के आधार पर पुलिस ने धारा बदलकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी थी। उसके बाद 22 सितंबर को दर्ज हुए बयान में पीड़िता ने कहा था कि उसके साथ रेप हुआ है। नए बयान के आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मेडिकल रिपोर्ट पर गौर करें तो उसमें युवती के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है।

क्या नार्को टेस्ट से होगी रेप केस की पुष्टि?
पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान पीड़िता के तीन बार बयान हुए। युवती ने पहले मारपीट, फिर छेड़छाड़ व उसके बाद रेप की बात कही थी। यही वजह है कि योगी सरकार ने पुलिसकर्मियों के साथ परिवार के लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट और नार्को टेस्ट करवाने की बात की है।

SIT को पीड़िता के बयान पर शक
पीड़िता ने घटना के बाद अलग-अलग बयान दिए थे। SIT को शक है कि घटना की शुरुआत से ही कोई पीड़िता या पीड़ित परिवार पर गैंगरेप वाला बयान देने को उकसा रहा था। उत्तर प्रदेश पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट के ज़रिए ये जानना चाहती है कि आखिर शुरू से लेकर आखिर तक पूरी घटना का सिलसिलेवार सच क्या है।

क्या है नार्को एनालिसिस टेस्ट?
नार्को एनालिसिस टेस्ट में व्यक्ति के शरीर में एक केमिकल इंजेक्शन के द्वारा डाला जाता है। व्यक्ति के शरीर की नसों में जाते ही यह केमिकल अपनी प्रतिक्रिया दिखाने लगता है। जिसका परिणाम व्यक्ति गहरी नींद में जाने लगता है, जिसको नीमबेहोशी की हालत भी कहा जा सकता है। इस हालत में व्यक्ति को न तो पूरी बेहोशी ही आती है और न ही वह पूरे होश में रहता है। इस दौरान साइंटिस्ट और डॉक्टर जांच एजेंसी द्वारा दिए गए सवाल पूछते हैं और व्यक्ति से सच जानने की कोशिश करते हैं।












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