विकास दुबे एनकाउंटर केस: जांच आयोग ने पुलिस को दी क्लीनचिट, 797 पेज की रिपोर्ट में कही यह बात
विकास दुबे एनकाउंटर केस: जांच आयोग ने पुलिस को दी क्लीनचिट, 797 पेज की रिपोर्ट में कही यह बात
लखनऊ, 20 अगस्त: दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की पुलिस से हुई मुठभेड़ मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने अपनी 797 पेज की रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में जांच आयोग ने एनकाउंटर को सही ठहराते हुए पुलिस को क्लीनचिट दे दी है। इतना ही नहीं, शासन को सौंपी रिपोर्ट में आयोग ने विकास दुबे से साठगांठ करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास दुबे और उसके गैंग में शामिल सभी अपराधियों को स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का संरक्षण मिला था। स्थानीय थाने और राजस्व के अधिकारी विकास दुबे के संपर्क में थे और कई सुविधाएं ले रहे थे। विकास दुबे का वर्चस्व अफसरों के संरक्षण में ही फल-फूल रहा था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस डॉ. बीएस चौहान इस न्यायिक आयोग की अध्यक्षता कर रहे थे। वहीं, हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज शशिकांत अग्रवाल और पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता कमेटी के सदस्य थे। जांच आयोग की रिपोर्ट गुरुवार (19 अगस्त) को विधानसभा में यूपी सरकार ने पेश की।
विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास दुबे पर कार्रवाई पुलिस-प्रशासन की अनदेखी का नतीजा था। विकास दुबे सर्किल के टॉप टेन अपराधियों में शामिल था, लेकिन जिले के टॉप टेन अपराधियों की सूची में उसका नाम नहीं थी। रिपोर्ट में बताया गया कि विकास दुबे और उसके गैंग पर 64 मुकदमे दर्ज थे, लेकिन विकास दुबे के लोग शांति समितियों के भी सदस्य थे। विकास दुबे मुठभेड़ के सभी पहलुओं की जांच के आधार पर आयोग ने कहा है कि घटना के संबंध में मुठभेड़ में शामिल पुलिस टीम ने जो भी तथ्य सामने रखे थे उसका खंडन किसी ने नहीं किया।
यही नहीं, पुलिस मुठभेड़ को फर्जी बताने वाली विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे ने हलफनामा दिया था. लेकिन वो भी अपना पक्ष रखने के लिए आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुईं। इस प्रकार मुठभेड़ को लेकर पुलिस पर संदेह नहीं किया जा सकता है। आयोग ने कहा है कि घटना की मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट में भी इसी तरह के निष्कर्ष सामने आए थे। इतना ही नहीं, आयोग ने विकास दुबे से संबधित प्रकरणों से संबंधित रिकॉर्ड के गायब होने के मामले में जिम्मेदार लोगों को दंडित करने की भी सिफारिश की है। साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की भी संस्तुति की गई है।












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