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खून से लथपथ यूपी की रेल पटरियां

नई दिल्ली( विवेक शुक्ला) उत्तर प्रदेश की रेल पटरियां खून से लथपथ हो रही हैं। अगर बात हिन्दी भाषी राज्यों की करें तो इनमे सबसे ज्यादा रेल हादसे उत्तर प्रदेश में ही हो रहे हैं, जिनमें लोग मारे जा रहे तथा घायल हो रहे हैं। अगर बात साल 2014 की करें तो उत्तर प्रदेश में 4 हजार से कुछ ज्यादा रेल हादसे हुए, जिनमें 3999 लोग मारे गए तथा 117 घायल हुए।

खूनी आंकडें

ये खूनी आंकड़ें जारी किए हैं नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने। ये तमाम अभागे लोग रेल हादसों से लेकर रेलों से कटने के कारण अपनी जान गंवा बैठे। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है। इधर पिछले साल 1926 रेल हादसों में 2702 लोग मारे गए। घायल हुए 206।

हिन्दी भाषी प्रदेश में रेल हादसों के स्तर पर तीसरे स्थान पर रहा बिहार। वहां पर 481 रेल हादसों में 485 लोग मारे गए। घायल हुए 10। बेशक, बिहार की तस्वीर उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश से तो काफी बेहतर नजर आती है।

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महाराष्ट्र सबसे खराब

हालांकि सबसे ज्यादा रेल हादसे हुए महाराष्ट्र में। इधर आठ हजार से कुछ कम 7969 रेल हादसे सामने आए पिछले साल। इनमें 5 ,024 लोग मारे गए। घायल हुए 3208। जाहिर है, ये आंकड़े बहुत भयानक हैं तथा बहुत कुछ कहते भी हैं।

उत्तर रेलवे के राजधानी स्थित मुख्यालय बड़ौदा हाउस में काम करने वाले एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने कहा कि अब रेल से कटने वाले लोगों का आंकड़ा बहुत बढ़ गया है। चूंकि रेल लाइनों के इर्द-गिर्द आबादी बहुत रहने लगी हैं तो लोग तेज आती-जाती रेलों के शिकार हो जाते हैं।

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