शासन प्रशासन की तू-तू, मैं-मैं....मंत्री ने दी गालियां!
लखनऊ। सूबे में सपा सरकार की मौजूदगी में शासन, प्रशासन अक्सर आपराधिक घटनाओं की वजह से कठघरे में खड़ा नजर आया है। लेकिन गर मामला हो किसी समाजवादी पार्टी के रसूखदार नेता से जुड़ा हुआ तो निश्चित तौर पर प्रशासन पर दबाव दूसरे तरीके का ही होगा। जी हां ये हमारा कहना नहीं बल्कि जनता का सरकार के लिए, प्रशासन के लिए मत है।
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उदाहरण के तौर पर आजम खां की भैंसों वाले कांड को फिर से झांक लीजिए। सवाल सुनवाई पर गंभीरता के मद्देनजर है। पक्ष दो हैं। पहला सरकार और दूसरा प्रशासन। बाकी जनता की खातिर डांट-डपट। थाने पर न्याय की खातिर चक्कर पर चक्कर काटते रहिए। सुनवाई बाया पहुंच के आधार पर मजबूती से होगी।
लेकिन पहुंच का मतलब न्याय से बिलकुल भी नहीं बल्कि उस अदृश्य दबाव से है जो तरह तरह के संकटों से रूबरू कराते हुए कर्तव्य को निभाने हेतु तत्पर कराता है। सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री राममूर्ति वर्मा अम्बेडकर नगर के इब्राहिमपुर थाने में तैनात दरोगा संजय यति को गाली गलौच करने की वजह से मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं।
अपाहिज व्यवस्थाओं में ये होना लाजमी है
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस ऑडियो की हकीकत की अभी तक पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन प्राप्त जानकारी के मुताबिक इब्राहिमपुर में तैनात रहे संजय यति को लाइन हाजिर करके उनकी तैनाती जैदपुर में कर दी गई है। जिसकी पुष्टि जैदपुर थाने में वन इंडिया की विभागीय लोगों से बातचीत के दौरान हुई।
गाली गलौच वो भी समाज की खातिर अहम जिम्मेवारियों के निर्वहन करने वाले व्यक्ति के द्वारा दूसरे जिम्मेवार व्यक्ति को। शायद ही इससे बद्तर कुछ हो सकता है। दरअसल अपाहिज हो चुके कर्तव्यों को तेजी से कदम बढ़ाने का भय है ये। पर वो भय जिसमें गालियां हों, शायद अपाहिज मानसिकता की श्रेणी में आता है।
मंत्री जी, माँ का भला क्या दोष?
ऑडियो क्लिप में कैबिनेट मंत्री राममूर्ति वर्मा पहले तो दारोगा संजय यति को काफी देर होल्ड में रखते हैं..कुछ देर बाद वे संजय को अपने पद की हनक दिखाते हुए डांटते फटकारते हैं। जिसका विरोध दबे हुए शब्दों में दारोगा के द्वारा किया जाता है। लेकिन मंत्री द्वारा गाली गलौच करने पर संजय पूरी तरह से आक्रामक अंदाज में उतरकर विरोध करने लगते हैं।












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