लखनऊ के इस परिवार पर कहर बनकर टूटा कोरोना, 22 दिन में 8 सदस्यों की मौत
लखनऊ, जून 01: कोरोना महामारी अब तक भारत में लाखों जिंदगियां ले चुका है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कोरोना के कहर का एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। बख्शी का तालाब इलाके में स्थित इमलिया पूर्वा गांव में कोरोना की दूसरी लहर में 22 दिनों के अंदर एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में परिवार के 4 भाई, 2 बहनें और दो माताएं हैं। सात मौतें कोरोना संक्रमण से और एक बुजुर्ग की मौत हार्ट अटैक से हुई है। परिवार ने बीते सोमवार को एक साथ अपने घर के 5 लोगों की तेरहवीं की। पांच लोगों की तस्वीर पर श्रद्धांजलि दी जा रही थी, जिसमें चार सगे भाई थे। कोरोना के चलते हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। चार महिलाएं विधवा हो गईं।

परिवार के सदस्य ने रोते हुए बयां किया दर्द
एक-एक कर परिवार के आठ सदस्यों को खो चुके ओमकार सिंह यादव ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि कोरोना ने महज 22 दिनों में उनसे चार भाई, दो बहनें, मां और बड़ी अम्मा को छीन लिया। उन्होंने एक-एक दिन में परिवार के दो-दो सदस्यों का अंतिम संस्कार किया है। ओमकार सिंह यादव बताते हैं कि सभी लोगों को बुखार था, फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया था। उन्होंने बताया कि सबसे पहले एक भाई निरंकार यादव को चंद्रिका देवी मंदिर के पास स्थित राम सागर मिश्र अस्पताल में भर्ती कराया था, क्योंकि वहीं पर ऑक्सीजन था। इधर, घर पर मां कमला देवी की हालत बिगड़ रही थी। मां का देहांत सुबह हुआ और भाई का दोपहर में तीन बजे। एक दिन में दो अर्थी घर से उठीं।
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एक-एक करके परिवार के आठ सदस्यों की मौत
इस बीच घर पर बहनों व बड़ी अम्मा की तबीयत बिगड़ने लगी थी। साथ ही तीन अन्य भाइयों की भी तबीयत खराब हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बहनें ससुराल से मां कमला देवी को देखने आईं थी, लेकिन उनकी भी तबीयत बिगड़ गई। ज्यादा बिगड़ने पर उनके पति आकर ले गए। इसके बाद एक-एक कर तीन और भाई विजय, विनोद और सत्य प्रकाश ने भी दम तोड़ दिया। उधर, ससुराल पहुंची बहनों मिथिलेश व शैल कुमारी की तबीयत बिगड़ती गई, उन्हें अस्पताल में जगह नहीं मिली और उन्होंने भी दम तोड़ दिया। बड़ी अम्मा रूपरानी की भी मौत हो गई।

चार महिलाओं के सुहाग उजड़े
कोरोना की वजह से परिवार की कमला देवी (82), रूपरानी (85), मिथिलेश कुमारी (56), शैल कुमारी (52), विजय कुमार (62), विनोद कुमार यादव (60), निरंकार यादव (50), सत्यप्रकाश (35) की मौत हो गई। चार महिलाओं कुसुमा, अन्नपूर्णा, सीमा और पूनम के सुहाग उजड़ गए। चारों एक दूसरे को सांत्वना भी नहीं दे पा रहीं थी। इनमें से दो सीमा और कुसुमा गांव में ही रहेंगी, जबकि अन्नपूर्णा ने सूर्यनगर आरडीएसओ कॉलोनी में पति द्वारा बनवाए गए मकान में शिफ्ट होने का फैसला किया है। पूनम अपने मायके काकोरी लौट जाने की बात कह रही हैं।












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