पापा मुलायम ने नहीं बेटे अखिलेश ने समझा देश के लिए अंग्रेजी का महत्व

मुलायम के इस बयान की यह कहकर भी निंदा की जा रही है कि संसद में सिर्फ हिंदी भाषी लोग नहीं हैं बल्कि देश के अलग अलग हिस्सों में रहने वाले लोग हैं जो कि हिंदी नहीं बोल सकते हैं। उनके लिए कम्युनिकेशन की प्रमुख भाषा अंग्रेजी है। इसके अलावा भारत जैसे बहुभाषी देश में जहां कई भाषाएं बोली जाती हैं वहां अंग्रेजी की उपेक्षा कभी नहीं की जा सकती है।
पुत्र अखिलेश को है अंग्रेजी से मोह
एक तरफ जहां मुलायम सिंह यादव अंग्रेजी भाषा पर प्रतिबंध लगाने की बात कह रहे हैं वहीं उनके पुत्र और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद सिडनी के एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल से पढ़े हुए हैं। उन्होने कई बार अपने अंग्रजी ज्ञान का प्रदर्शन भी किया है। सपा सरकार ने देश के विकास में तकनीक के महत्व को समझते हुए एक योजना के तहत लैपटॉप का वितरण भी किया था। कुछ लोगों का कहना है कि अखिलेश मैनचेस्टर यूनाइटेड फुटबाल क्लब के समर्थक हैं, और फुटबाल में भी गहरी दिलचस्पी रखते हैं।
पिछले दिनों अखिलेश ने सीआईआई ग्लोबल समिट के दौरान आगरा में अंग्रेजी में ही भाषण दिया था। मुलायम के बयान पर मानव संसाधन राज्यमंत्री शशि थरूर का कहना है कि 21वीं सदी में लोग अपने बच्चों को अंग्रजी माध्यम स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, यहां तक की खुद अखिलेश ने एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाई की है, ऐसे में मुलायम को अंग्रेजी भाषा के महत्व को समझना चाहिए।
हिंदी को प्रमोट किये जाने की जरूरत
हिंदी भारत की प्रमुख भाषा है, इसे राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा प्रमोट किया जाना चाहिए लेकिन इसके लिए जरूरी नहीं है कि अंग्रेजी पर प्रतिबंध लगाकर ही यह काम किया जा सकता है। अंग्रेजी आज युवाओं के रोजगार के अवसरों को देखते हुए, भारत के लिए अपरिहार्य बन चुकी है।












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