MP CM Mohan Yadav: बीजेपी के इस एक दांव ने निकाली अखिलेश-राहुल के इस बड़े अभियान की हवा?
Bhartiya Janta Party: देश में अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले बीजेपी ने मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को हटाकर मोहन यादव को सीएम बनाकर बड़ा दांव चल दिया है। मोहन यादव के बहाने बीजेपी की नजर यूपी और बिहार जैसे सटे हुए यादव बाहुल्य राज्यों के साथ साथ विपक्ष के जातीय जनगणना जैसे मुद्दे पर भी है। बीजेपी अपने इस दांव से जहां यूपी में अखिलेश यादव और बिहार में लालू यादव के पुत्र तेजस्वी यादव जैसे ओबीसी जातीय चेहरों को काउंटर करेगी वहीं दूसरी ओर इससे विपक्ष के जातीय जनगणना के मुद्दे को काउंटर भी करेगी।

मोहन यादव को सीएम बनाकर बीजेपी ने चला बड़ा दांव
बीजेपी ने 2024 से पहले काफी सोच समझकर मोहन यादव को सीएम बनाने का दांव चला है। उज्जैन दक्षिण से विधायक मोहन यादव को प्रदेश के सत्ता की कमान सौंपी गई है। ABVP के जरिए राजनीति में कदम रखने वाले मोहन यादव का संघ से गहरा नाता रहा है। आज विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के लिए उनके नाम पर मुहर लगी। पूर्व मुख्यमंत्री और चार बार मध्य प्रदेश के सीएम रहे शिवराज सिंह चौहान ने ही मोहन यादव का नाम सीएम पद के लिए प्रस्तावित किया। 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान जानिए किन उम्मीदवारों को हरा कर मोहन यादव विधायक चुने गए।
यूपी में अखिलेश यादव बड़ा यादव चेहरा
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यूपी में यादव समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव पर सीएम रहते हुए जाति विशेष के लिए काम करने का आरोप लगाया था। हालांकि यूपी में तो अखिलेश यादव अपने समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं लेकिन वही जब वो एमपी में जाते हैं तो उनको उतना समर्थन नहीं मिलता है जितना यूपी में मिलता है। कुछ ऐसा ही हाल बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी का भी है। वह भी बिहार के क्षत्रप बनकर रह गए हैं। बिहार के बाहर उनको उनको समर्थन नहीं मिलता है।
यूपी कितना काम करेगा बीजेपी का ये दांव
बीजेपी ने मोहन यादव को सीएम बनाकर दांव खेला है। बीजेपी के रणनीतिकारों की माने तो मोहन यादव के नाम पर यूपी और बिहार में यादवों का वोट मिले या न मिले लेकिन इससे समाज में एक बड़ा सियासी संदेश जाएगा। इस एक तीर से पीएम मोदी 2024 के चुनाव में विरोधियों पर हमला बोल सकते हैं। मोहन यादव के तौर पर अब बीजेपी की तरकश में एक तीर और हो गया जो विरोधियों को हमेशा परेशान करेगा।
2024 से पहले बीजेपी ने ढूंढी जातीय जनगणना की काट?
हालांकि बीजेपी के इस दांव को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह 2024 में इसका प्रभाव कितना पड़ेगा यह देखना बाकी होगा लेकिन बीजेपी ने हिन्दी पट्टी में एक बड़ा सियासी संदेश तो दे ही दिया है। 1990 में मंडल लागू होने के बाद सामाजिक न्याय के नाम पर जातिवादी राजनीति शुरू हुई थी वो अपनी धार खो चुकी है। सपा और आरजेडी ने नया हथियार चुना था जातीय जनगणना। इसीलिए उन्होंने उन्होंने इसको बड़ा मुद्दा बनाया था। बीजेपी ने उसकी काट खोज ली है। छत्तीसगढ़ में जनजातीय हो गया और एमपी में ओबीसी बनाया है।
राजनीतिक विश्लेषक बीरेंद्र नाथ भट्ट कहते हैं कि,
मोहन यादव जब यूपी और बिहार में कैंपेन करेंगे तो इसका असर तो दिखेगा। मोहन यादव मध्य प्रदेश का चौथा बैकवर्ड चीफ मीनिस्टर हैं। जबकि सपा और आरजेडी में केवल यादव ही होता है। यही सबसे बड़ा अंतर है। गठबंधन को लगता है कि हिन्दुत्व की गोलबंदी को जाति में बांटो इसीलिए जातिय जनगणना का माहौल बनाया इसकी हवा बीजेपी ने अपने कार्ड से निकाल दिया है।
वहीं बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने वनइंडिया से बातचीत में कहा, बीजेपी ने हमेशा ही सबका साथ और सबका विकास का नारा दिया है। इसी मंत्र पर बीजेपी काम कर रही है और पांच राज्यों में चुनाव में जिस तरह से जनता ने समर्थन दिया वह बीजेपी की उसी सोच का परिणाम है। पीएम मोदी के नेतृत्व में समाज के हर वर्ग के उत्थान का काम बीजेपी कर रही है। सिर्फ जातिय जनगणना के नाम पर रोने वालों के लिए ये बड़ा संदेश है।
SBSP के राष्ट्रीय महासचिव विशेष बातचीत में कहा कि,
विपक्ष हमेशा एक ही नारा देता था कि जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। बीजेपी ने मोहन यादव और छत्तीसगढ़ में अरुण साव को सीएम बनाकर यह बता दिया है कि वह सिर्फ कहने में नहीं बल्कि करने में विश्वास करती है। बीजेपी पिछड़े और अनुसूचित जाति के तबके को प्रतिनिधित्व देकर इनको सही मायने में सम्मान देने का काम किया है।












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