लखनऊ: स्किन ट्रीटमेंट के दौरान डॉक्टर ने मरीज को दे दी कैंसर की दवा, मौत
लखनऊ। स्किन ट्रीटमेंट के दौरान कैंसर की दवा देने से एक मरीज की मौत हो गई। मामले में सीजेएम सुदेश कुमार ने लखनऊ में गाजीपुर थानाध्यक्ष को डॉक्टर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला
अतिका सिंह की ओर से वकील आलोक सिंह ने डॉ. अबीर सास्वत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग करते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी। अतिका सिंह ने बताया कि पति अशोक सिंह को त्वचारोग था। 25 जून 2018 उन्होंने डॉक्टर अबीर सास्वत से इलाज शुरू करवाया। डॉक्टर अबीर ने अशोक की बायोप्सी की और 3 अगस्त को कैंसर का इलाज करने वाली दवा दी। इस दवा को देने के बाद अशोक की तबीयत बिगड़ गई, लेकिन डॉक्टर ने इसके बाद भी 2 बार वही दवा दी। 25 सितंबर 2018 को अशोक की मौत हो गई।

कोर्ट ने दिए एफआईआर दर्ज करने के आदेश
अतिका ने बताया कि भारत सरकार के औषधि मानक संगठन की ओर से भी इसकी पुष्टि की गई है कि अशोक को retuximab दवा नहीं दी जानी चाहिए थी। अतिका ने डॉक्टर अबीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अर्जी दी थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

क्या होती है बायोप्सी?
बायोप्सी एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें शरीर से ऊतक या कोशिका के एक सैंपल को लैब में जांच करने के लिए निकाला जाता है। अगर आप में कुछ निश्चित प्रकार के संकेत या लक्षण महसूस हो रहे हैं या अगर आपके डॉक्टर को त्वचा के किसी क्षेत्र में किसी प्रकार का संदेह होता है, तो आपको बायोप्सी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, यह जानने के लिए कि आपको कैंसर है या कोई अन्य समस्या है। अगर कैंसर की संभावनाएं ज्यादा हैं, तो रोग की निश्चित पहचान के लिए बायोप्सी नमूने की नजदीक से जांच करना एक मात्र तरीका है। लेकिन अगर डॉक्टर बायोप्सी करना चाहते हैं, या कर रहे हैं इसका मतलब ये नहीं की कैंसर ही है।
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