मदुरै ट्रेन हादसे में लखनऊ की दादी-पोती की हुई मौत, परिवार का रो-रोकर हुआ बुरा हाल
Madurai Train Fire incident: तमिलनाडु के मदुरै रेलवे स्टेशन पर पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस के प्राइवेट कोच में शनिवार की सुबह अचानक आग लग गई। जिस प्राइवेट कोच में आग लगी वो कोच यूपी के 63 लोगों का था जो यार्ड में खड़ा हुआ था। प्राइवेट कोच में सवार 9 लोगों की मौत हो गई। जिन नौ लोगों की मौत हुई उनमें लखनऊ की एक दादी और उसके साथ रामेश्वर यात्रा पर गई उनकी पोती भी शामिल है।

इस हादसे में जिस परिवार की बुजुर्ग मां और जवान बेटी को खोया है वो चौक के मनोज अग्रवाल का परिवार है। मनोज अग्रवाल की 81 वर्षीय मां मनोरमा अग्रवाल और उनकी 22 साल की बेटी हिमानी बंसल की इस हादसे मौत हुई है। मां और बेटी की मौत की खबर सुनकर पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
दादी की मदद के लिए पोती साथ गई थी
हिमानी बंसल अपनी दादी मनोरमा की मदद के लिए उनके साथ रामेश्वरम तीर्थ यात्रा पर उनके साथ गई थी। दादी पोती इस यात्रा पर जाने से पहले बहुत उत्साहित थे। पूरा परिवार 30 तारीख को उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था लेकिन मौत की खबर सुनकर पूरा परिवार सदमे में है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
चौक के अग्रसेन कालेज के पास भवानी गली के रहने वाले मनोज अग्रवाल के पास जब शनिवार की दोपहर जब पता चता तो वो बेहोश हो गए । इस हादसे में मां के साथ अपनी जवान बेटी की मौत ने पूरी तरह से उन्हें और उनके परिवार को तोड़ दिया है। 22 साल की हिमानी की मां तो रो रोकर बस ये ही कह रही हैं कि मेरी बेटी को वापस ले आओ अब कहीं नहीं भेंजूगी। वहीं पिता ने रोते हुए बताया कि हम अपनी बेटी की जल्द शादी करने की तैयारी कर रहे थे।
शुक्रवार की रात बेटी और मां से हुई थी आखिरी बार बात
मनेाज अग्रवाल ने बताया कि अपनी बेटी और मां से आखिरी बार बात शुक्रवार की शाम 7:30 बजे हुई थी। वो दोनों बहुत उत्साहित थे क्योंकि शनिवार को वो लोग कई मंदिर यात्रा के लिए जाने वाले थे।
टीवी के जरिए हादसे के बारे में पता चला
पिता ने बताया शनिवार की सुबह बेटी हिमानी के फोन पर कॉल की तो किसी पुलिस वाले ने फोन उठाया तो उसने बताया कि कोई ये फोन थाने में जमाकर गया है। जिसके बाद वो लगातार रेवले की हेल्प लाइन पर फोन मिलाते रहे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दोपहर में उन्हें टीवी के जरिए ट्रेन हादसे के बारे में पता चला और लिस्ट में अपनी बेटी और मां का नाम था। जिसके बाद रेलवे ने भी फोन पर उनकी मौत के बारे में बताया।
रेलवे ने कैसे की इतनी बड़ी लापरवाही
दुखी पिता ने आईआरसीटीसी और भारतीय रेलवे पर गुस्सा जताते हुए दुखी पिता ने कहा कि रेलवे कैसे यात्रियों की जान को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही कर सकता है। उसने यात्री को कोच के अंदर सिलेंडर ले जाने कैसे दिया।पिता ने कहा सरकार के मुआवजे को लेकर क्या करेंगे जब मां और बेटी ही नहीं रही।
17 अगस्त को लखनऊ से रवाना हुए थे ये यात्री
बता दें तीर्थयात्रा के लिए स्पेशल ट्रेन का ये कोच सीतापुर से रामेश्वरम लिए गया था। जिसमें लखनऊ के अग्रवाल परिवार के ये दो सदस्य भी गए थे। प्राइवेट कोच 17 अगस्त को लखनऊ से चला था, जिसे वापस 30 अगस्त को लौटना था।
जानें कैसे हुआ ये हादसा
बताया जा रहा है कि देर रात कोच मदुरै पहुंचा था। सुबह जिस समय कोच में आग लगी उस समय सब सोए हुए थे। रेलवे कोच के अंदर सिलेंडर का इस्तेमाल करना बताया जा रहा है। काफी बनाने समय आग लगी और थोड़ी ही देर में पूरी ट्रेन में आग पकड़ ली। इस प्राइवेट कोच मे 63 लोग यूपी के लोग सवार थे। इस घटना में सुरक्षित बचे लोगों ने बताया कि वो लोग सो रहे थे तभी कोच में आग लगी और हम लोग बड़ी मुश्किल से गेट खोलकर अपनी जान बचाकर बाहर निकले, जो लोग निकल नहीं पाए उनकी जलकर मौत हो गई।
चौक सर्राफा एसोसिएशन ने मामले की स्पष्ठ जांच की उठाई मांग
चौक सर्राफा एसोसिएशन के सचिव विनोद महेश्वरी ने इस हादसे पर दुख जताते हुए इस हादसे की सीबीआई जांच करने की मांग उठाई है। उन्होंनें कहा ये रेलवे प्रशासन की घोर लापरवाही ही तो है जो कोच के अंदर सिलेंडर था और उसकी उसे कानों कान खबर तक नहीं थी। आखिर सिलेंडर को कोच में रखने की इजाजत दी ही क्यों गई । उन्होंने कहा कि जिस अग्रवाल परिवार ने अपनी मां और जवाब बेटी को खोया है उनके जख्मों को क्या कोई सरकारी मुआवजा भर पाएगा?












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