स्मार्ट सिटी बनने का सपना एक बार फिर टूट सकता है लखनऊ का
लखनऊ। मुस्कुराइये कि आप लखनऊ में हैं, जी हां जब आप लखनऊ में आते हैं तो कुछ ऐसा ही लिखा हुआ आपको मिल जाएगा। लेकिन जिस तरह से स्मार्ट सिटी की लिस्ट में लखनऊ अपनी जगह बनाने में विफल रहा हैं, उसने लोगों के मुस्कुराने की वजह को थोड़ा कम जरूर किया है।
पहली बार स्मार्ट सिटी की लिस्ट में आने से विफल रहने के बाद लखनऊ दूसरी बार भी यह मौका खो सकता है। लखनऊ नगर निगम के पास स्मार्ट सिटी के खाके के साथ तैयार रहने के लिए कहा गया था, लेकिन नगर निगम एक बार फिर से समय सीमा के भीतर यह खाका अन्य विभागों के साथ एमओयू साइन करने के लिए भेजने में विफल हो गया है।
लखनऊ मेट्रो का फाइनल डिजाइन फ्रांस में, चेन्नई में शुरु होगा निर्माण
नगर निगम को 6 अप्रैल तक रिवाइज्ड प्रपोजल का प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजना था। विलंब से प्रपोजल भेजने की वजह से अब केंद्र सरकार को यह 21 अप्रैल तक नहीं पहुंच पाएगा। अडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर पीके श्रीवास्तव ने कहा कि डीएम के हस्तक्षेप के बाद कई सरकारी विभागों ने एमओयू साइन कर दिये हैं, लेकिन उनका पत्र देर से पहुंचा है। जिसके चलते रिवाइज्ड प्रपोजल प्लान बनाने में विलंब हुआ। हमारा लक्ष्य है कि 11 अप्रैल तक राज्य सरकार के सामने स्मार्ट सिटी का प्लान दिखाया जा सके।

लखनऊ नगर निगम
एमओयू लखनऊ नगर निगम और 11 अन्य सरकारी विभाग के बीच है।

दस्तावेज मुहैया कराने में विफल
आधे से ज्यादा विभाग जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने में विफल रहे।

एक तिहाई काम
कूडा प्रबंधन अपनी क्षमता का सिर्फ एक तिहाई काम कर रहा है।

आधे शहर का कूड़ा उठाने में ही सफल
पिछले तीन साल में नगर निगम सिर्फ आधे शहर का कूड़ा उठाने में ही सफल हो सके।

कूड़ा उठाने की सुविधा पूरी तरह से नहीं
अभी भी लोगों के घर से कूड़ा उठाने की सुविधा पूरी तरह से नहीं दी जा सकी है।












Click it and Unblock the Notifications