58.25 करोड़ लोगों को धर्म का पाठ पढ़ाने वाली कंपनी अनिश्चितकाल के लिए बंद
लखनऊ। भारत में धर्म का क्या महत्व है किसी से छिपा नहीं है, काशी से लेकर, प्रयाग, अयोध्या सहित अध्यात्म के हर पहलु से लोगों को अवगत कराने वाली गीता प्रकाशन अनिश्चितकालीन के लिए बंद हो गयी है। गीता प्रकाशन भारत में हिंदू धर्म से संबंधित साहित्यों का प्रकाशन करने वाली सबसे बड़ी कंपनी है

धार्मिक साहित्यों का देश का सबसे बड़ा, पुराना, विश्वसनीय और प्रामाणिक गीता प्रेस में कर्मचारियों और कंपनी के अधिकारियों के बीच विवाद के चलते गीता प्रेस ने यह फैसला लिया है। वर्ष 1923 से धार्मिक साहित्यों का लगातार प्रकाश करने वाला गीता प्रेस मजदूरों से संबंधित मामलों के कारण अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। गीता प्रेस ऐसे समय में बंद हुआ है, जब नरेंद्र मोदी विदेशी नेताओं को गीता भेंट कर रहे हैं और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने के लिए आवाज उठा चुकी हैं।
कई भाषाओं में बताया धर्म का अर्थ
पिछले 93 सालों में गीता प्रेस ने 37 करोड़ गीता, रामायण, भागवत, दुर्गा सप्तशती, पुराण, उपनिषद, भक्त गाथा तथा अन्य चरित्र निर्माण संबंधित पुस्तकें संस्कृत, हिंदी, गुजराती, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, बांग्ला, उड़िया, तेलुगू, कन्नड़ तथा अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में बेहद कम कीमत पर बेची जा चुकी हैं। संस्थान के मासिक प्रकाशन हिंदी में कल्याण तथा अंग्रेजी में कल्याण-कल्पतरू तीन लाख ग्राहकों के साथ यह देश का सबसे बड़ा ग्राहक वर्ग रखने वाली धार्मिक पत्रिकाएं हैं।
58.25 करोड़ पुस्तकें बिक चुकी हैं
गीता प्रेस ने तकरीबन हर भारतीय को अपनी किताबों से सनातन धर्म से अवगत कराया है। श्रीमद्भागवतगीता के विभिन्न संस्करणों की 11.5 करोड़ प्रतियां, गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस तथा अन्य काव्यों की 9.22 करोड़ प्रतियां, उपनिषद तथा प्राचीन ग्रंथ की 2.27 करोड़ प्रतियां, बच्चों तथा महिलाओं के लिए खासकर छोटी-छोटी किताबों की 10.05 करोड़ प्रतियां, भक्त गाथा (संतों की जीवनी) तथा भजन की 12.24 करोड़ प्रतियां अब तक बेची जा चुकी हैं।
ये है विवाद
गीता प्रेस में काम करने कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें हर वर्ष कंपनी वेतन में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी, 30 दिनों की पेड लीव तथा 20 फीसदी मकान किराया भत्ता दिया जाए। इसके लिए उन्होंने 1982 में भी हड़ताल की थी, जो लगातार 44 दिनों तक चली थी। लेकिन आजतक कर्मचारियों की उस मांग को माना नहीं गया है। जिसके चलते कर्मचारी फिर से हड़ताल पर जा रहे हैं।
वहीं गोरखपुर जिला स्थित प्रेस को बंद करने पर निराशा प्रकट करते हुए कंपनी के अधिकारी ने कहा कि वीरेंद्र सिंह, राम जीवन शर्मा तथा मुनीवर मिश्रा को साथी कर्मचारियों को भड़काने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। तीनों कर्मचारियों को बर्खास्त करने तथा प्रेस को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने के फैसले से जिला प्रशासन, पुलिस तथा राज्य के श्रम विभाग को अवगत करा दिया गया है।












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