आज है चुनाव- जानिये यूपी विधान परिषद का पूरा सियासी समीकरण
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आज विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव है। आज विधान परिषद की 13 सीटों के लिए चुनाव होगा। लेकिन इस चुनाव को राज्यसभा चुनाव से पहले का रिहर्सल माना जा रहा है।
अखिलेश को सताने लगा यूपी चुनाव हार का डर, बोले मुकाबला त्रिकोणीय होगा

कैसे चुने जाते हैं एमएलसी
विधान परिषद के सदस्यों के चुनाव में चुने हुए विधायक ही हिस्सा लेते हैं
कितने वोटों की जरूरत
29 विधायकों के समर्थन से विधान परिषद की सीट पक्की हो जाती है
विधान सभा में पार्टियों की स्थिति
- सपा- 229
- बसपा- 80
- भाजपा- 41
- कांग्रेस- 29
- रालोद- 8
- पीस पार्टी- 4
- कौमी एकता दल- 2
- एनसीपी- 1
- टीएमसी- 1
- अपना दल- 1
- आईएमसी- 1
- निर्दलीय- 6
कुल विधायक- 403
भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव अपने विधायकों के मतों से अधिक प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। ऐसे में कई उम्मीदवार नजरें बनाये हुए हैं कि वोटो का बहुमत किस ओर करवट लेता है। विधायकों को चुनाव से पहले अपने पक्ष में करने की सियासत देर रात तक चलती रही। छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों पर पार्टियां खास नजर बनाये हुए हैं।
विधान परिषद की कुल 13 सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें से समाजवादी पार्टी के 8 उम्मीदवार, बसपा के 3, भाजपा के 2 व कांग्रेस का 1 उम्मीदवार मैदान में है। खास बात यह है कि भाजपा के पास कुल 41 विधायक है लेकिन उसने विधान परिषद के चुनाव के लिए दो प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने दूसरे प्रत्याशी के रूप में दयाशंकर सिंह को मैदान में उतारा है।
भाजपा के अतिरिक्त उम्मीदवार के मैदान में उतारने की वजह से विधान परिषद के चुनाव में मतगणना की नौबत आ गयी है। भाजपा के इस दांव से सभी दलों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं और उन्हें इस बात का दर्द सता रहा है कि कहीं उनके विधायक टूट नहीं जाए।
आपको बता दें कि विधान परिषद का चुनाव जीतने के लिए कुल 29 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। सपा के पास कुल 229 विधायक हैं, ऐसे में वह कुल 8 विधायकों को जिता सकता है लेकिन उसे 3 अन्य विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
मुलायम-अजीत गठबंधन अहम
लेकिन माना जा रहा है कि सपा के कुछ विधायक नाराज हैं लिहाजा वह क्रास वोटिंग कर सकते हैं। लेकिन सपा को रालोद ने अपना समर्थन दिया है जिसके पास कुल 8 विधायक हैं ऐसे में अजीत-मुलायम की दोस्ती यहां काम आ सकती है। रालोद के अलावा सपा के पास पीस पार्टी के तीन, कौमी एकता दल के दो, इत्तेहाद- ए- मिल्लत काउंसिल के एक वह पांच निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन देने का भरोसा दिया है।
बसपा जुटी समीकरण साधने में
वहीं बसपा के पास कुल 80 विधायक हैं ऐसे में वह सिर्फ तीन ही विधायक मैदान में उतार सकती है। लेकिन उसे भी 7 अन्य विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। लिहाजा बसपा तृणमूल के विधायकों से संपर्क साधे है। बसपा अन्य पार्टियों के विधायकों और निर्दलीय विधायकों पर भी नजर बनाये हुए है।
भाजपा का गणित
इस चुनाव में सबसे बड़ा दांव भाजपा ने खेला है, उसके पास सिर्फ 41 विधायक हैं लेकिन उसने दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। भाजपा को दूसरा उम्मीदवार जिताने के लिए 12 अतिरिक्त वोट चाहिए ऐसे में वह एनसीपी, अपना दल और एक निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाने में लगी हुई है।
कांग्रेस का समीकरण
कांग्रेस के पास कुल 29 विधायक हैं, लेकिन जिस तरह से कुछ विधायक पार्टी से नाराज हैं माना जा रहा है कि वह पार्टी के खिलाफ क्रास वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस भी रालोज के तीन वोटों को साधने में जुटी हुई है। रालोद अध्यक्ष अजीत सिंह ने पहले कह दिया है कि वह सपा के बाद बाकी समर्थन कांग्रेस को देगी।












Click it and Unblock the Notifications