रमजान की पूरी जानकारी के लिए लखनऊ में हेल्पलाइन नंबर शुरू

सवाल 1: रमजान के रोजों का शरई हुक्म क्या है?
जवाब: रोजा हर अकलमंद और बालिग मुसलमान मर्द व औरत पर फर्ज है।
सवाल 2: रोजा फर्ज होने की क्या शर्ते हैं?
जवाब: रोजा फर्ज होने की छह शर्ते हैं (1) मुसलमान होना (2) बालिग होना (3) अकलमंद होना (4) तंदुरुस्त होना (5) स्थायी होना (6) हैज व निफास से पाक होना
सवाल 3: क्या नाबालिग को रोजा रखना चाहिए?
जवाब: जब बच्चा सात साल का हो जाए तो बड़ों को चाहिए कि उसे रोजा रखने को कहें और जब 10 बरस का हो जाए तो उस पर सख्ती करें।
'रमजान में भरपूर बिजली-पानी दे सपा सरकार'
रमजान की शुरुआत सोमवार से हो गई है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी सहित प्रदेशभर में बिजली संकट लगातार बरकरार है। मौसम की बढ़ती तपिश ने रोजेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रसीद फिरंगी महली ने कहा कि इस बार रमजान बेहद गर्मी और उमस के मौसम में है, इसलिए प्रदेश सरकार को बिजली व पानी का मुकम्मल इंतजाम करने चाहिए।
फिरंगी महली ने कहा कि इस बार रोजे बड़े होंगे। इसलिए सरकार को कम से कम सहरी, इफ्तार और तराबी की नमाज के वक्त जरूर बिजली देनी चाहिए। हालांकि लखनऊ के जिला प्रशासन के साथ हुई बैठक में जिलाधिकारी राजेशखर की ओर से राजधानी में बिजली-पानी की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया गया है।
मौलाना की मांग है कि रमजान में पर्याप्त बिजली सिर्फ लखनऊ में ही नहीं, पूरे प्रदेश के लोगों को मिले, ताकि रोजेदारों को तकलीफ न हो। उधर, सियासी दल भी रमजान में बिजली की मांग पूरी किए जाने को लेकर प्रदेश सरकार पर दबाव बनाने में जुट गए हैं।
बसपा के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता को बिजली देने में नाकाम है। कम से कम रमजान जैसे पवित्र महीने में तो उसे पर्याप्त बिजली उपलब्ध करानी चाहिए। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को रमजान के दौरान बिजली, पानी एवं कानून-व्यवस्था की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे रोजदारों को इबादत करने में किसी प्रकार की मुश्किल का सामना न करना पड़े।












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