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जानिए कैसे पड़ा 'दशहरी आम' का नाम दशहरी और क्या है 200 साल पुराने चमत्कारी पेड़ का रहस्य

आज हम आपको बताएंगे कि कैसे बेहद मशहूर और विविध आम की किस्म 'दशहरी' का नाम दशहरी पड़ा? कैसे मलिहाबाद में एक टहनी चोरी कर दशहरी आम उगाया गया और क्या है 200 साल पुराने चमत्कारी पेड़ का रहस्य?

how Dussehri Mango got its name 200 years old miraculous tree Different varieties of mangoes

जैसे-जैसे गर्मियां आ रही हैं, आम हमारे जीवन में इसे और बेहतर बनाने के लिए प्रवेश करने वाले हैं। आम और ग्रीष्मकाल साथ-साथ चलते हैं, जहां गर्मी का अहसास भी नहीं होता जब तक कि हम अपने पेट से ज्यादा आम नहीं खा लेते। भारत के साथ ही दुनिया के और भी देशों में आम की अलग-अलग किस्में मिलती हैं।
क्या आप जानते हैं कि केवल भारत के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 15 से भी ज्यादा आम की किस्में हैं। जिनके स्वाद से लेकर महक तक अलग होती हैं। वहीं इन आमों का रंग भी एक दूसरे से बिलकुल अलग होता है। आज हम आम की जिस किस्म के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं, वो किसी पहचान की मौहताज नहीं है। आम की इस किस्म का नाम है 'दशहरी', जो शायद सबसे ज्यादा उत्तर भारत में बिकने वाली आम की तमाम किस्मों में से एक है।

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200 साल पुराना विशाल आम का पेड़
दरअसल, लखनऊ की काकोरी तहसील में मौजूद है दशहरी गांव। यह कोई मामूली गांव नहीं है क्योंकि मलिहाबाद और अवध की बेहद मशहूर और विविध आम की किस्म 'दशहरी' का नाम इसी गांव के ऊपर रखा गया है। यह इसीलिए क्योंकि यहां मौजूद है दशहरी आमों से लदा हुआ 200 साल पुराना विशाल आम का पेड़, जिसकी घनी-हरी टहनियों से लटकते हैं मोती जैसे सैंकड़ों दशहरी आम। इस पेड़ को मदर ऑफ़ मैंगो ट्री भी कहा जाता है। इसकी खास बात ये है कि दिन की चिलचिलाती 42 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद, फैलती शाखाओं के नीचे आप एक अनोखी ठंड महसूस करेंगे और पेड़ की हरी भरी छत्रछाया में आराम से आश्रय लेते हुए पक्षियों के चहकने की आवाज़ को सुन सकेंगे। आपको बता दें कि इस विशाल मैंगो ट्री को अब उत्तर प्रदेश सरकार ने हेरिटेज ट्री का दर्जा दे दिया है।

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    असल में दशहरी आम दशहरी गांव की पहचान है न कि मलिहाबाद की
    मलीहाबाद को पूरे उत्तर भारत में आम के सबसे बड़े बागों में से एक के रूप में जाना जाता है। यहां उगाए जाने वाले आमों की कई अलग-अलग किस्मों में दशहरी सबसे लोकप्रिय है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए, सितंबर 2009 में, इस पूरे क्षेत्र को भारत की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा 'मैंगो मलिहाबाद दशहरी' के रूप में रजिस्टर किया गया था। मलिहाबाद की विशेष पैदावार दशहरी को स्वाद और खुशबू के कारण दुनियाभर में शोहरत मिली है। यह आम अन्य प्रजातियों के मुकाबले टिकाऊ भी है, इसलिए इसकी पहुंच भी देश-विदेश तक है। लेकिन माना जाता है कि दशहरी गाँव के इस मदर ट्री की कलम से दशहरी के बाग लगे।
    दशहरी गांव के निवासी छोटे लाल कनौजिया बताते हैं कि पेड़ बचपन से लेकर आज तक एक ही तरह का है। इसमें कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। यह पेड़ दशहरी गांव की पहचान है, लेकिन कोई इस पेड़ की टहनी चुराकर मलिहाबाद ले गया था और उसने मलिहाबाद में दशहरी आम को प्रसिद्ध कर दिया। असल में दशहरी आम दशहरी गांव की पहचान है न कि मलिहाबाद की। साथ ही उनका यह भी कहना है कि यह पेड़ चमत्कारी पेड़ है।

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