मुनव्वर राणा ने कहा- अफगानिस्तान का हिंदुस्तान से पुराना नाता है, तालिबान नहीं पहुंचायेगा कोई नुकसान
मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने कहा- अफगानिस्तान का हिंदुस्तान से पुराना नाता है, तालिबान नहीं पहुंचायेगा कोई नुकसान
लखनऊ, 19 अगस्त: अफगानिस्तान की सत्ता अब तालिबान के हाथों में आ गई है। तो वहीं, तालिबानियों के हाथों में अफगानिस्तान की सत्ता आने के बाद से भारत में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। बता दें कि सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क और बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर के बाद एक और नाम जुड़ गया है। वो नाम है मशहूर शायर मुनव्वर राणा का।
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मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने आजतक को दिए अपने इंटरव्यू के दौरान कहा,
किसी अफगानी से आज तक किसी हिन्दुस्तानी को बुरा कहा, ना ही नुकसान पहुंचाया। हालांकि, तालिबान की क्रुरता के सवाल पर कहा कि जितनी क्रूरता अफगानिस्तान में है, उससे ज्यादा क्रूरता तो हमारे यहां पर ही है। पहले रामराज था, लेकिन अब कामराज है, अगर राम से काम है तो ठीक वरना कुछ नहीं।
मुनव्वर राणा ने कहा कि हिन्दुस्तान को तालिबान (Taliban) से डरने की ज़रुरत नहीं है, क्योंकि अफगानिस्तान से जो हजारों बरस का साथ है उसने कभी हिन्दुस्तान को नुकसान नहीं पहुंचा। जब मुल्ला उमर की हुकूमत थी तब भी उसने किसी हिन्दुस्तानी को नुकसान नहीं पहुंचाया, क्योंकि उसके बाप-दादा हिन्दुस्तान से ही कमा कर ले गए थे।
मुनव्वर राणा यहीं नहीं रूके, उन्होंने आगे कहा,
एक बार तो नुकसान पाकिस्तान से हो सकता है, लेकिन अफगानिस्तान से नुकसान नहीं हो सकता। यहां पर भी अभी जिन लोगों की हुकुमत है, वो भी तो पहले जमाने में तालिबानी ही थे। कहा कि अच्छा और बुरा बनने में कोई वक्त नहीं लगता है। अगर बुरे नहीं बनते है तो हजारों साल नहीं बनते है।
राणा ने कहा कि अगर इतिहास उठाकर देखे तो आपको पता चल जाएगा कि अफगानी हमेश से हिन्दुस्तानियों के साथ खड़े रहे है। बता दें कि मुनव्वर राणा अपने इस बयान के बाद से ही निशाने पर आ गए हैं।
इससे पहले सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने भी अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जों को लेकर बयान दिया था। अब वो तालिबान के समर्थन में दिए अपने बयान के कारण मुश्किलों में फंस गए है। दरअसल, मंगलवार 17 अगस्त को सांसद बर्क ने कहा था कि अफगानिस्तान की आजादी अफगानिस्तान का अपना मामला है। अफगानिस्तान में अमेरिका की हुक्मरानी क्यों? उन्होंने कहा कि तालिबान वहां की ताकत है। अमेरिका, रूस के तालिबान ने पैर नहीं जमने दिए। तालिबान की अगुवाई में अफगान आजादी चाहते हैं। भारत में भी अंग्रेजों से पूरे देश ने लड़ाई लड़ी थी। रहा सवाल हिंदुस्तान का तो यहां कोई कब्जा करने अगर आएगा उससे लड़ने को देश मजबूत है।
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