सत्यबोध दाता जी बोले धर्मांतरण से पहले दूर करें कुरीतियां

बांदा। धर्मांतरण या घर वापसी से पूर्व हिन्दू धर्म में व्याप्त छुआछूत, भेदभाव और ऊंचनीच की कुरीतियों को दूर करना चाहिए, इसके बाद अन्य धर्म अपनाने वाले खुद हिन्दू धर्म में ‘घर वापसी' शुरू कर देंगे। यह बात सोमवार को सत्साईं सत्बोध धाम कुल्लूखेड़ा के प्रबंधक सत्बोध दाता जी ने कही।

Conversion could overcome ill practices of Hindu religion

उन्होंने कहा, "हिन्दू धर्म को मानने वाली अनुसूचित वर्ग की कुछ कौमें ऐसी है, जिन्हें मठ-मन्दिर में पूजा-अर्चना करने की इजाजत नहीं है।"

सत्साईं सत्बोध धाम कुल्लूखेड़ा के प्रबंधक सत्बोध दाता जी ने सोमवार को कहा कि हिन्दू धर्म के कथित ठेकेदार धर्मांतरण या घर वासपी के बहाने सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने तुले हैं। हिन्दूवादी संगठनों को इस अभियान से पहले हिन्दू धर्म में व्याप्त छुआछूत, भेदभाव व ऊंचनीच जैसी कुरीतियों को दूर करना चाहिए।

उन्होंने कहा, "हिन्दू धर्म को मानने वाली अनुसूचित और जनजाति वर्ग में आज भी ऐसी कई कौमें हैं, जिन्हें मठ-मन्दिर में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने की इजाजत नहीं है।"

वह कहते हैं, "गांव देहात में बसने वाली अनुसूचित कौम की बाल्मकि (मेहतर) जाति का इस्तेमाल साफ सफाई के लिए तो किया जाता है, लेकिन पूजा-अर्चना या रामायण-गीता के पाठ करने पर मनाही है।"

उनका कहना है कि ‘हिन्दू धर्म के पुरोधा जिस दिन कुरीतियों को दूर करने में सफल हो गए, उस दिन खुद इस धर्म को छोड़ने वाले घर वासपी शुरू कर देंगे। दाता जी ने दावा कि हिन्दू धर्म त्यागने वाले ज्यादातर अनुसूचित व जनजाति कौम से जुड़े लोग हैं, जो छुआछूत व भेदभाव की वजह से अपना धर्म बदला है।

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