Sikh In Iran: जंग के बीच ईरान में फंसे सिख, कोई नहीं कर रहा मदद! शिया देश में कितने सिख परिवार?

Sikh In Iran: ईरान इन दिनों इस सदी की सबसे भयानक जंग का थिएटर बना हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग में ईरान के हजारों लोग अब तक मारे जा चुके हैं और कई देशों के लोग भी ईरान के अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं। इनमें एक बड़ी संख्या सिख समुदाय की भी है। जिनको लेकर अब चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इसी बीच बीजेपी के नेता जयवीर शेरगिल ने गुरुवार को विदेश मंत्रालय से अपील की कि तेहरान के एक गुरुद्वारे में फंसे कई बुजुर्ग ईरानी सिखों को तुरंत मदद देने की अपील की है। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि ईरान में कितने सिख हैं और वहां किस हाल में रहते हैं। साथ ही ईरान में सिखों का क्या इतिहास है।

फ्लाइट में नहीं मिल रही बोर्डिंग

जयवीर शेरगिल ने बताया कि 5 मई को तेहरान से भारत आने के लिए महान एयर की एक फ्लाइट निर्धारित है। लेकिन एयरलाइन इन बुजुर्ग सिख परिवारों को भारत सरकार की स्पेशल परमीशन के बिना यात्रा करने की इजाजत नहीं दे रही है। इसी वजह से ये लोग अब भी फंसे हुए हैं। लिहाजा जयवीर शेरगिल ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर मामले में दखल देने की बात कही है।

Sikh In Iran

सोशल मीडिया साइट X पर शेरगिल ने लिखा-

"विदेश मंत्रालय तेहरान में फंसे सिख परिवारों की मदद करे। उन्होंने कहा कि महान एयरलाइंस 5 मई को भारत के लिए उड़ान भरने वाली है, लेकिन एयरलाइन भारत सरकार की अनुमति के बिना बोर्डिंग से मना कर रही है।"

इसके साथ ही उन्होंने जयशंकर से इन परिवारों की मदद करने का आग्रह किया।

हम भारतीय लोगों के संपर्क में- MEA

इसी बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में बन रही स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारतीय मिशन लगातार लोगों के संपर्क में हैं और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हमारी हेल्पलाइन चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। भारतीय मिशन वहां मौजूद भारतीय फेडरेशन, प्रोफेशनल ग्रुप्स, कंपनियों और अन्य लोगों के साथ भी लगातार संपर्क में हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर भारतीय तक सही समय पर जानकारी और सहायता पहुंच सके।

मुश्किल हालात के बावजूद यात्रा जारी

ऑपरेशनल चुनौतियों के बावजूद भारत और इस क्षेत्र के बीच यात्रा जारी है। 28 फरवरी से अब तक लगभग 12,96,000 यात्री इस क्षेत्र से भारत की यात्रा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि कनेक्टिविटी और ट्रैवल डिमांड अभी भी बनी हुई है।

अब तक 2,445 भारतीयों को निकाला गया

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अब तक 2,445 भारतीय नागरिकों को जमीनी मार्गों के जरिए ईरान से बाहर निकलने में मदद की है। यह अभियान लगातार जारी है।

ईरान में सिखों का इतिहास

ईरान में सिखों की मौजूदगी 20वीं सदी की शुरुआत से मानी जाती है। उस समय कई सिख व्यापारी और कुछ सैनिक ब्रिटिश भारत से ईरान पहुंचे। बाद में व्यापार, ट्रांस-ईरानियन रेलवे प्रोजेक्ट और सीमावर्ती कारोबार के कारण सिख परिवार वहां बसने लगे। खासकर ज़ाहेदान शहर में शुरुआती सिख आबादी रही। 1979 की ईरानी क्रांति से पहले वहां सिखों की संख्या ज्यादा थी। कुछ सोर्स ये भी बताते हैं कि उस समय समुदाय हजारों में था, लेकिन क्रांति और युद्ध के बाद काफी लोग भारत, यूरोप या अन्य देशों में चले गए। अभी ज्यादातर सिख तेहरान, जादेहान और बंदर अब्बास में रहते हैं।

ईरान में कितने प्रमुख गुरुद्वारे?

• तेहरान गुरुद्वारा (Bhai Ganga Singh Sabha / Masjid-e-Hindan)
• ज़ाहेदान गुरुद्वारा
• मशहद गुरुद्वारा
• बुशेहर गुरुद्वारा

आज ईरान में सिख समुदाय कैसा है?

• अधिकतर सिख ईरानी नागरिक हैं।
• घर में पंजाबी बोलते हैं, बाहर फ़ारसी या स्थानीय भाषाएं।
• गुरुद्वारों में अरदास, लंगर और सामुदायिक कार्यक्रम होते हैं।
• समुदाय छोटा होने के बावजूद अपनी पहचान बनाए हुए है

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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