सीएम उम्मीदवार के साथ यूपी के चुनावी रण में उतरेगी कांग्रेस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंकना चाहती है। इसके लिए उसने अपने सबसे मजबूत चेहरे गुलाम नबी आजाद को यूपी का प्रभारी बनाया है। गुलाम नबी आजाद को यूपी की कमान सौंपने के साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री पद के दावेदार के साथ चुनावी मैदान में कदम रखेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे चेहरे को आगे किया जाएगा जो सभी को साथ लेकर चल सकता हो।

समय से पहले होगी सीएम की घोषणा
आजाद ने कहा कि मुझे विश्वास है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा सामने होना चाहिए और उम्मीद है कि यह चेहरा चुनाव से पहले सामने होगा। उन्होंने कहा कि हमें चीजों को दुरुस्त करने के लिए कुछ काम करने की जरूरत है। मैं अभी इस बात पर नहीं बोल सकता हूं कि क्या करने की जरूरत है। लेकिन मेरे दिमाग में कुछ काम हैं जिन्हें समय के साथ किया जा सकता है।
प्रियंका गांधी को मिल सकती है कमान
कयास लगाये जा रहे हैं कि यूपी में पार्टी प्रियंका गांधी वाड्रा को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर सकती है। हालांकि प्रियंका के करीबी सूत्रों ने ऐसी संभावना से इनकार किया है।
सभी धर्मों को एक साथ लेकर चलना चाहती है कांग्रेस
आजाद ने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने का नहीं है बल्कि समाज में हर धर्म और संप्रदाय के लोगों को एक साथ लाने का है। उन्होंने कहा कि पिछले समय में मुजफ्फरनगर की घटना घटी, मथुरा का हादसा हुआ और कई जगहों पर आने वाले समय में इस तरह के हादसे होने की संभावना है।
आजाद ने कहा कि कुछ प्रादेशिक और राष्ट्रीय पार्टियां है जिन्हें लगता है कि लोगों धर्म जाति के नाम पर बांटे बिना चुनाव में जीत हासिल नहीं हो सकती है। पार्टियों की यह सोच सत्ता में आने के लिए लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रही है।
हालांकि जब आजाद से इस बारे में पूछा गया कि पार्टी कब मुख्यमंत्री पद के दावेदार के नाम की घोषणा करेगी तो उन्होंने कहा कि अभी जल्दबाजी नहीं है लेकिन इस चुनाव से पहले हो जाएगा। गौरतलब है कि पिछले काफी समय से यूपी में कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इस बात की मांग करते आ रहे हैं कि पार्टी को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करनी चाहिए।
चेहरे के साथ ही मैदान में उतरते हैं पीके
प्रशांत किशोर ने पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कांग्रेस को पंजाब दा कैप्टन के नाम से चुनाव प्रचार में उतारा है। बिहार में नीतीश कुमार के नाम से पार्टी ने चुनाव लड़ा था। इससे पहले 2014 में नरेंद्र मोदी के नाम से पीके ने चुनावी रण में जीत हासिल की थी।
पीके के करीबियों की मानें तो वह चाहते हैं कि पार्टी किसी ब्राम्हण को चेहरा बनाये। लेकिन आजाद ने कहा कि सवाल ब्राह्मण, राजपूत, मुस्लिम, दलित या पिछड़े का नहीं है बल्कि ऐसे चेहरे की तलाश है जो सभी को एक साथ लेकर चल सके।
मिस्त्री के काम से खुश नहीं थे पीके
आजाद ने कहा कि जब पार्टी मजबूत स्थिति में होती है तो यह मायने नहीं रखता है कि कौन पार्टी की कमान संभाल रहा है। हमें मौजूदा वक्त में जरूरत है अपनी स्थिति को हर स्तर पर मजबूत करने की और मुझे लगता है कि समय के साथ पार्टी लीडरशिप के साथ आगे आयेगी। सूत्रों की मानें तो मधुसुदन मिस्त्री से पीके खुश नहीं थे जिसकी वजह से गुलाम नबी आजाद को यूपी चुनाव की कमान सौंपी गयी है।
वहीं अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन के सवाल पर पीके ने कहा कि अभी हमने गठबंधन के बारे में नहीं सोचा है, भविष्य के बारे में भी मैं अभी कुछ नहीं कह सकता हूं क्योंकि मैंने अभी किसी से बात नहीं की है। आजाद ने कहा कि सामान्य तौर पर हम अकेले ही चुनावी मैदान में जाते हैं। यूपी चुनाव की तैयारियों के लिए आजाद गुरुवार को लखनऊ में पीसीसी की एग्जेक्युटिव की जिला अध्यक्षों की बैठक में शामिल होंगे, जहां यूपी चुनाव के लिए पार्टी मंथन करेगी।












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