हाथरस केस: मायावती ने कहा- पीड़ित परिवार से सबसे पहले मिला था बसपा प्रतिनिधिमंडल, सरकार को दी ये सलाह

लखनऊ। हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलने के लिए प्रियंका गांधी और राहुल गांधी भारी हंगामे के बीच शनिवार को खुद उनके घर पहुंचे। एक दिन बाद भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात की। राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने पुलिस की लाठियां की खाईं, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो अहम चेहरे मायावती और अखिलेश यादव अभी तक सड़क पर नहीं उतरे। दोनों ही नेता सोशल मीडिया के जरिए इस मामले में अपनी बात रख रहे हैं और सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर हैं। मायावती और अखिलेश के इस रवैये से अब सवाल उठने लगे हैं आखिर क्यों ये दोनों नेता सड़क पर नहीं उतरे। इन सबके बीच बसपा सुप्रीमो मायावती का बयान सामने आया है। मायावती अब ये जाहिर करने में जुट गई हैं कि सबसे पहले बसपा प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने गया था। मायावती ने यूपी सरकार को सलाह भी दी है।

bsp chief mayawati tweeted on hathras incident

...जिसने मुझे मीडिया में जाने के लिए मजबूर किया

मायावती ने सोमवार दो ट्वीट किए। पहले ट्वीट में कहा, ''हाथरस गैंगरेप कांड के बाद सबसे पहले पीड़ित परिवार से मिलने व सही तथ्यों की जानकारी के लिए वहां 28 सितम्बर को बीएसपी प्रतिनिधिमण्डल गया था, जिनकी थाने में ही बुलाकर उनसे वार्ता कराई गई थी। वार्ता के बाद मिली रिपोर्ट अतिःदुखद थी, जिसने मुझे मीडिया में जाने के लिए मजबूर किया।'' अपने अगले ट्वीट में बसपा सुप्रीमो ने कहा, ''इसके बाद वहां मीडिया के जाने पर भी उनके साथ हुई बदसलूकी तथा कल व परसों विपक्षी नेताओं व लोगों के साथ पुलिस का हुआ लाठीचार्ज आदि अति-निन्दनीय व शर्मनाक। सरकार को अपने इस अहंकारी व तानाशाही वाले रवैये को बदलने की सलाह, वरना इससे लोकतन्त्र की जड़े कमजोर होंगी।''

'डीएम के रहते मामले की निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है'

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    इससे पहले मायावती ने ट्वीट किया था, ''हाथरस गैंगरेप कांड के पीड़ित परिवार ने जिले के डीएम पर धमकाने आदि के कई गंभीर आरोप लगाए हैं, फिर भी यूपी सरकार की रहस्मय चुप्पी दुःखद व अति-चिन्ताजनक। हालांकि, सरकार CBI जांच हेतु राजी हुई है, किन्तु उस डीएम के वहाँ रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच कैसे होे सकती है? लोग आशंकित।

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