स्वामी प्रसाद के बाद मायावती को एक और बड़ा झटका
लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले एक के बाद एक मायावती को दो बड़े झटके लगे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्या के बाद अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। आरके चौधरी को बसपा के संस्थापक सदस्यों में माना जाता है।
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उन्होंने आज प्रेस कांफ्रेंस के जरिए खुद को बसपा से अलग करने का फैसला सुनाय। उन्होंने भी पार्टी पर टिकटों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। चौधरी ने पार्टी के महासचिव ने बसपा सुप्रीमों पर पार्टी के टिकटों की बिक्री का आरोप लगाते हुए कहा कि मायावती चाटुकारों के कहने पर अपने फैसले लेती हैं और वह धन उगाही की शौकीन हैं।
बसपा को राजेंद्र चौधरी ने राजनैतिक पार्टी की बजाए रियल स्टेट कंपनी करार दिया है। उन्होंने कहा कि मायावती पैसों के लिए टिकटों को किसी को भी दे सकती हैं। उन्होंने पार्टी को चाटुकारों की भी पार्टी कहा है। आरके चौधरी पार्टी के संस्थापक काशीराम के साथी रहे हैं और उन्हें पार्टी की नींव डाले जाने वाले नेता के रूप में जाना जाता है।
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उन्होने दलित समाज को जागरूक करने के अभियान में काशीराम के साथ अहम भूमिका निभायी थी। समाजवादी पार्टी में मायावती के बढ़ते प्रभाव के चलते आरके चौधरी ने 2001में बसपा को अलविदा कह दिया था। लेकिन उन्होंने 2013 में फिर से बसपा का दामन थामा था।












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