विधानसभा अध्यक्ष को अखिलेश ने लिखा पत्र, चाचा शिवपाल यादव की सदस्यता रद्द करने वाली याचिका ले रहे वापस
लखनऊ। 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल देखने को मिली है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित को पत्र लिखा है। पत्र में अखिलेश यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मैनपुरी के जसवंतनगर से विधायक और चाचा शिवपाल यादव की विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की याचिका को वापस लेने की बात कही है। इससे दोनों पार्टियों के बीच गठबंधना का रास्ता खुल सकता है।

रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलती दिखी
दरअसल, सैफई में होली के अवसर पर शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच रिश्ते पर जमी बर्फ पिघलती दिखी। मंच में मुलायम के साथ अखिलेश और शिवपाल मौजूद रहे। अखिलेश ने शिवपाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और कार्यकर्ता चाचा-भतीजा जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। इस पर अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं पर खफा भी हुए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को इशारों में ही सीमा न लांघने की बात कही थी।
पिछले साल सदस्यता समाप्त करने की दी गई थी याचिका
बता दें कि पार्टी में एकाधिकार को लेकर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले ही चाचा-भतीजे के बीच महाभारत शुरू हो गई थी। शिवपाल ने विधानसभा चुनाव के बाद प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली थी। पिछले साल सितंबर में सपा ने शिवपाल की सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के यहां याचिका दाखिल की थी।
नेता प्रतिपक्ष ने की पुष्टि
नेता प्रतिपक्ष नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी ने इस याचिका को वापस करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि आपके सम्मुख जो याचिका विचाराधीन है, उसमें पूरे प्रपत्र नहीं लगे हैं। जरूरी प्रपत्र हम प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। इस कारण आपको निर्णय लेने में भी असुविधा हो रही है। इसलिए याचिका को वापस कर दिया जाए। राम गोविन्द चौधरी ने बताया कि याचिका वापसी को पत्र लिखा गया है। इसे दोबारा लगाया जाएगा या नहीं, इसका निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लेंगे।
हमारे परिवर में कोई खटपट नहीं: शिवपाल सिंह यादव
वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ह्दय नारायण दीक्षित ने बताया कि उनके ऑफिस में याचिका वापस करने का पत्र मिल गया है। फिलहाल विधानसभा सचिवालय बंद चल रहा है। इसका परीक्षण कराया जाएगा और जो भी विधि व संविधान सम्मत होगा वह निर्णय लिया जाएगा। इसस पहले 8 मार्च को शिवपाल सिंह यादव ने कहा था कि हमारी पार्टी अलग है। हमारा प्रयास है कि हम 2022 में समाजवादी पार्टी से तालमेल करेंगे, लेकिन हमारी पार्टी रहेगी और चुनाव चिह्न हमारा चाभी ही रहेगा। उन्होंने कहा, 'हमारे परिवार में कोई खटपट नहीं है, सिर्फ राजनीतिक दल अलग-अलग हैं।'












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