मुस्लिम बोर्ड के प्रवक्ता सज्जाद नोमानी ने की तालिबान की तारीफ, कहा- हिंदुस्तानी मुसलमान का आपको सलाम
लखनऊ, 18 अगस्त: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। मौलाना सज्जाद नोमानी ने तालिबान के समर्थन में बयान देते हुए कहा, 'मैं तालिबान को सलाम करता हूं। तालिबान ने पूरी दुनिया की सबसे ज्यादा मजबूत सेनाओं को शिकस्त दी। इन नौजवानों ने काबुल की जमीन को चुमा और अल्लाह को शुक्रिया कहा।'
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नोमानी ने कहा- यह हिंदुस्तानी मुसलमान आपको सलाम करता है
सज्जाद नोमानी ने आगे कहा, एक बार फिर यह तारीख रकम हुई है। एक निहत्थी कौम ने सबसे मजबूत फौजों को शिकस्त दी है। उन्होंने कहा कि काबुल के महल में वे (तालिबानी) दाखिल हुए। उनके दाखिले का अंदाज पूरी दुनिया ने देखा। उनमें कोई गुरूर और घमंड नहीं था। बड़े बोल नहीं थे। मुबारक हो। आपको दूर बैठा हुआ यह हिंदुस्तानी मुसलमान सलाम करता है। आपके हौसले को सलाम करता है। आपके जज्बे को सलाम करता है।

'दुनिया को बता दिया कौमी इरादा और कुर्बानी सबसे ऊपर है'
मौलाना सज्जाद नोमानी ने एक वीडियो मैसेज जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा, '15 अगस्त 2021 की तारीख इतिहास बन गई। अफगानिस्तान की सरजमीं पर एक निहत्थी और गरीब कौम, जिसके पास न साइंस, न टेक्नोलॉजी, न दौलत, न हथियार और न तादाद थी, उसने पूरी दुनिया की सबसे ज्यादा मजबूत फौजों की शिकस्त दी और काबुल के सरकारी महल में वो दाखिल हुए। उनके दाखिले का अंदाज जो दुनिया ने देखा, उसमें गुरूर और बड़े बोल नहीं नजर आए। नजर आया तो वो नौजवान, जो काबुल की सरजमीं को चूम रहे हैं और अपने मालिक का शुक्र अदा कर रहे हैं। जिन नौजवानों ने हर मुसीबत के बावजूद एक बार फिर ये दुनिया को बता दिया संख्या और हथियार नहीं, कौमी इरादा और कुर्बानी सबसे ऊपर है। जो कौम मरने के लिए तैयार हो जाए, उसे दुनिया में कोई शिकस्त नहीं दे सकता है।'

नोमानी ने कहा- तालिबान को मुबारक हो
नोमानी ने कहा, 'तालिबान को मुबारक हो। आपका दूर बैठा हुआ ये हिंदी मुसलमान आपको सलाम करता है, आपके गर्व और आपकी हिम्मत को सलाम करता है। आपके जज्बे को सलाम करता है। ये मंजर पूरी दुनिया ने देख लिया कि जिसने आपकी बात नहीं मानी, आपने उसे भी गले लगाया, आम माफी का ऐलान कर दिया। अगर कोई अपने इलाके से जाना चाहता था तो आपने उसे जाने दिया। पूरे देश में महिलाओं से बदसलूकी का एक भी वाक्या नहीं सामने आया। इस तरह के झूठे इल्जाम आप पर बहुत लगते रहे हैं। मजहबी तौर पर भी जोर-जबरदस्ती नहीं की गई। अब बाजार खुल गए, बच्चियां स्कूल जाती दिखाई दे रही हैं। मैं सभी को सलाम-ए-मोहब्बत भेजता हूं।'

सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने किया था समर्थन
इससे पहले समाजवादी पार्टी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे को सही ठहराते हुए कहा था कि अफगानिस्तान की आजादी अफगानिस्तान का अपना मामला है। अफगानिस्तान में अमेरिका की हुक्मरानी क्यों? उन्होंने कहा कि तालिबान वहां की ताकत है। अमेरिका रूस के तालिबान ने पैर नहीं जमने दिए। तालिबान की अगुवाई में अफगान आजादी चाहते हैं। भारत में भी अंग्रेजों से पूरे देश ने लड़ाई लड़ी थी। रहा सवाल हिंदुस्तान का तो यहां कोई कब्जा करने अगर आएगा उससे लड़ने को देश मजबूत है।












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