'किसानों को कुचलने के आरोपी मंत्री के बेटे की जमानत रद्द हो', सरकार से SIT ने 2 बार कहा
लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा चुनावी सीजन में जेल से बाहर निकाला गया। उसे विरोध के बावजूद जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने बताया है कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस पर ऐतराज जताया था। एसआईटी ने यूपी सरकार से आशीष मिश्रा की दो बार जमानत रद्द करने को कहा। हालांकि, आशीष मिश्रा की जमानत रद्द नहीं हुई।

बता दें कि, अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति ने इस लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इसमें कहा गया है कि, उक्त मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को दो बार मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को दी गई जमानत को रद्द करने की सिफारिश की थी। इसकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सबूत इस बात की पुष्टि करते हैं कि केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उस जगह पर थे, जिसमें आठ लोग मारे गए थे, और वो अक्टूबर में यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा अपनाए गए मार्ग में बदलाव के बारे में जानते थे।

आशीष मिश्रा पर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मौर्य के दौरे के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुचलने का आरोप है। उन दिनों किसान संगठनों की अगुवाई में हजारों लोग देश के विभिन्न स्थानों पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे, जिन्हें बाद में केंद्र सरकार ने निरस्त कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 मार्च को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द नहीं करने को लेकर विशेष जांच दल की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश प्रशासन से सवाल किया था। आशीष मिश्रा को पिछले साल 9 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भड़की हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा जमानत दिए जाने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया गया। आशीष मिश्रा के वकीलों ने 14 फरवरी को जमानत आदेशों के संबंध में तीन-तीन लाख रुपये के दो जमानत बांड जमा किए थे।
3 अक्टूबर को हुई थी हिंसा
लखीमपुर खीरी में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 3 अक्टूबर, 2021 को हुई झड़पों में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी।












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