Success Story: कभी आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे राजकरन, 'केले की खेती' ने बदली किस्मत
Success Story Kushinagar Banana Farmer Rajkaran: खेती से भी किस्मत बदली जा सकती है। इसका जीता जागता उदाहरण केले की खेती करने वाले राजकरन हैं। राजकरन कुशीनगर के मड़ार बिन्दुवलिया के रहने वाले है। यह पिछले पांच से सात वर्षों से केले की खेती कर रहे हैं। केले की खेती से हुए मुनाफे ने इनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी है। वन इंडिया हिन्दी से खास बातचीत में उन्होंने केले की खेती के बारे में विस्तार से चर्चा की।
इतनी आती है लागत
राजकरन लगभग 6 बीघा जमीन में केले की खेती करते हैं। शुद्ध रुप से जैविक खाद में खेती करते हैं। वह बताते हैं कि पौधा लगाने से पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। जुताई से लेकर पौध लगाने तक लगभग एक लाख से अधिक तक खर्च हो जाते हैं।

इनते दिन बाद कटती है फसल
राजकरन बताते हैं कि पहली बार फसल काटने के लिए 13 से 14 माह का समय लगता है। प्रति एकड़ लगभग 500 से 600 क्विंटल हर केला निकलता है। दूसरी बार में 11 से 12 माह का समय लगता है व तीसरी बार में मात्र आठ माह में केले की फसल तैयार होती है।
सलाना दो गुना होता है मुनाफा
राजकरन बताते हैं कि इस खेती में मुझे दो गुना से तीन गुना का मुनाफा होता है। व्यापारी खेत से ही केला खरीद ले जाते हैं। केले की खेती ने मेरे और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर दी है।
उत्तर प्रदेश ही नहीं बिहार भी जाता है केला
राजकरन बताते हैं के केला तैयार होने के बाद से स्थानीय बाजार जैसे घुघली, परतावल, भटहट में तो बिकता ही है। इसके अलांवा गोरखपुर मंडी, संतकबीरनगर, बस्ती सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जाता है। इसके साथ ही शिवान, गोपालगंज सहित बिहार में भी यहां के केलों की डिमांड है।












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