Kota: क्या शांति धारीवाल के 'प्रेशर' ने ले ली सबसे बड़ी घंटी बनाने वाले दो इंजीनियरों की जान?
राजस्थान के कोटा रिवर फ्रंट पर घंटा खोलते समय हादसे में इंजीनियर देवेंद्र आर्य व रामकेश की मौत हो गई। इस मामले में देवेंद्र के बेटे धनंजय ने कई सवाल खड़े किए हैं।
राजस्थान की शिक्षानगरी कोटा में चंबल रिवर फ्रंट पर हादसे में दो इंजीनियरों की जान चली गई। दोनों चंबल रिवर फ्रंट पर लगाए 78 किलोग्राम के घंटे को खोलते समय हादसे का शिकार हो गए।
मरने वाले इंजीनियरों की शिनाख्त कास्टिंग इंजीनियर देवेंद्र आर्य (आयरनमैन) व सहायक इंजीनियर धौलपुर निवासी रामकेश के रूप में हुई है। पूरे मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब इंजीनियर देवेंद्र के बेटे धनंजय आर्य ने कोटा यूआईटी पर सवाल उठाए।

धनंजय का आरोप है कि उनके पिता की मौत यूआईटी अधिकारियों की लापरवाही की वजह से हुई है। यूआईटी के अफसर उनके पिता को घंटी निकालने के लिए परेशान करते थे। कहते थे कि शांति धारीवाल का बहुत प्रेशर है।
कोटा के कुन्हाडी एसएचओ महेंद्र मीणा ने बताया कि चंबल रिवर फ्रंट पर घंटा खोलने को लेकर विवाद था। आखिर आर्य घंटा खोलने को तैयार हो गए। दो तीन दिन पहले ही काम शुरू किया। रविवार को मोल्ड बॉक्स पर खड़े देवेंद्र व रामकेश मजदूरों व हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से घंटा निकाल रहे थे।
उसी समय गार्डन हाइड्रोलिक मशीन से छूते ही खिसक कर तीन टुकड़ों में टूट गया। क्रेन की बेल्ट टूटने की बात भी आई है। रामकेश गार्डर के नीचे दब गए, देवेंद्र टकराकर 25 फीट नीचे गिरे।
बता दें कि दुनिया के सबसे बड़े घंटे को निकालने के लिए 80 दिन तक यूआईटी व ठेकेदार ने कोशिश की, लेकिन नहीं निकला। आखिर इसे सांचे में ढालने वाले इंजीनियर देवेंद्र को बुलाया। घंटे की ढलाई देवेंद्र ने अस्थायी फैक्ट्री लगाकर की थी।












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