कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बनाई कमेटी, चुनाव के बाद हिंसा की होगी जांच
कोलकाता, जून 21: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को जांच के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रिटायर जस्टिस अरुण मिश्रा ने कोर्ट के आदेशों के अनुसार पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा की शिकायतों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है, जो 7 सदस्यीय समिति होगी।

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सात सदस्यीय समिति में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष आतिफ रशीद, राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य राजुलबेन एल देसाई, पश्चिम बंगाल राज्य मानवाधिकार आयोग के रजिस्ट्रार प्रदीप कुमार पांजा एनएचआरसी सदस्य राजीव जैन की अध्यक्षता में बनाई गई है।
दरअसल, शुक्रवार (18 जून) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा पर ममता सरकार की भूमिका पर सवालिया निशाना लगाएं, जिसके बाद कोर्ट ने इन हिंसा की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक समिति गठित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार को गठित समिति का सहयोग करने के लिए भी कहा था।
राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कही यह बात
वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने इस हिंसा पर कहा कि मैं यह देखकर स्तब्ध हूं कि चुनाव समाप्त होने के 7 सप्ताह बाद भी इस गंभीर स्थिति की अनदेखी की जा रही है। आजादी के बाद चुनाव के बाद यह सबसे बर्बर हिंसा है।
18 जून को हुई जनहित याचिका पर सुनवाई
बता दें कि बंगाल चुनाव के परिणाम आने के बाद वहां जमकर हिंसा की खबरें आई, जिसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर 5 जजों की पीठ ने 18 जून को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग के काम पर नाखुशी जताई और कहा कि चुनाव खत्म हो चुके हैं, लोगों को शांति से जीने का अधिकार है।












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