पढ़ने से रोका तो मुस्लिम लड़की ने दिया पति को तलाक, बोली- मैं मलाला बनना चाहती हूं

पढ़ने से रोका तो 16 साल की मुस्लिम लड़की ने दे दिया पति को तलाक, बोली- मैं मलाला बनना चाहती हूं

कोलकाता। देशभर में तलाक और महिलाओं के अधिकरों के बहस के बीच पश्चिम बंगाल के छोटे से गावं की लड़की ने एक ऐसा काम किया है, जो पढ़ने की चाह रखने वाली बहुत सी लड़कियों के लिए एक मिसाल है। 16 साल की लड़की ने इसलिए अपने पति को तलाक दे दिया क्योंकि वो उसके पढ़ने के खिलाफ था।

पढ़ने से रोका तो 16 साल की मुस्लिम लड़की ने दे दिया पति को तलाक, बोली- मैं मलाला बनना चाहती हूं

दो साल पहले हुई थी शादी

दो साल पहले हुई थी शादी

कोलकाता से 55 किमी दूर मुल्लिकपुर मंदिरबाजार की रहने वाली मम्पी खातून की शादी 2015 में उनके परिजनों ने करा दी थी। पिता ने गांव टेकपंजा मे उसकी शादी करा दी और वो दुल्हन बन चली गई। मम्पी शादी के वक्त दसवीं भी नहीं कर पाई थी, ऐसे में उसका मन था कि शादी के बाद वो पढ़ाई जारी रखे।

नहीं देने दी दसवीं की परीक्षा

नहीं देने दी दसवीं की परीक्षा

शादी के बाद मम्पी ने दसवीं की परीक्षा देने की ख्वाहिश अपने शौहर से जाहिर की लेकिन उसने इससे साफ इंकार कर दिया और कहा कि वो घर का काम करे, पढ़ाई-लिखाई के चक्कर में ना पड़े। इससे खफा होकर मम्पी अपने माता-पिता के घर आ गई। उसने अपने परिजनों से कहा कि वह आगे पढ़ना चाहती है और पिछले महीने मई में मम्पी ने मथुरापुर के कृष्णचंद्रपुर हाई स्कूल में दसवीं में दाखिला लेकर पढ़ना शुरू कर दिया।

ससुराल वालों ने कहा, छोड़ो पढ़ाई

ससुराल वालों ने कहा, छोड़ो पढ़ाई

मम्पी के ससुरालवालों को जब पता चला कि मम्पी ने मायके जाकर स्कूल में दाखिला ले लिया तो वो मम्मी के घर पहुंचे और उससे पढ़ाई छोड़ ससुराल चलने को कहा। मम्मी ने इससे साफ इंकार कर दिया, उसके माता-पिता ने भी उसका साथ दिया। मम्पी के पिता ने उसके ससुरालवालों से कहा कि हमने उसकी कच्ची उम्र में शादी कर गलती की थी लेकिन अब वो उसे पढ़ाई से नहीं रोकेंगे। इस पर ससुराल वाले खफा हुए तो मम्पी ने कहा कि वो पति को तलाक दे रही है और इस रिश्ते को खत्म कर रही है।

'मलाला हैं मेरी रोल मॉडल'

'मलाला हैं मेरी रोल मॉडल'

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, मम्पी इस पूरे घटनाक्रम से खुश हैं। उसने कहा कि उसके अम्मी-अब्बु ने उसका साथ दिया, इससे वो बहुत खुश है। वो कहती हैं कि नॉबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसूफजई की जिंदगी उसे बेहद प्रभावित करती है, क्योंकि मलाला ने खुद अपनी राह चुनी। वो कहती हैं कि मैं भी पढ़-लिखकर मलाला की तरह अपने रास्ते खुद बनाऊंगी।

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