Katni news Video: नेत्रहीन ने ढोलक थाप पर गाया ऐसा भजन कि कलेक्टर हो गए मगन, सुनिए मंत्रमुग्ध कर देने वाला गीत
कलेक्टर अवि प्रसाद दृष्टिबाधित दिव्यांग कृष्णा चौधरी से मिले। वहां कलेक्टर साहब ने खुद कृष्णा से बात की ओर गाना सुननाने के लिए कहा, फिर क्या था कृष्णा चौधरी ने मधुर आवाज में कृष्ण कन्हैया पर गाना सुनाने लगे

Katni news : कलेक्टर अवि प्रसाद का एक वीडियो कटनी जनसंपर्क ने ट्वीट किया है। वीडियो में कलेक्टर अवि प्रसाद सड़क किनारे बैठे हैं। उनके बगल में बैठकर एक नेत्रहीन ढोलक की थाप पर उन्हें भजन सुना रहा है। यह वीडियो बहोरीबंद तहसील के तिगवां का है, जहां कलेक्टर शुक्रवार को निरीक्षण करने गए थे। लोकगीत गा रहे नेत्रहीन बच्चे का नाम कृष्णा चौधरी है। वह देख नहीं सकता है लेकिन अपनी मधुर आवाज से सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। कलेक्टर अवि प्रसाद भी उसकी मधुर आवाज सुनकर खुद को रोक नहीं पाए और इतने प्रभावित हुई कि देर तक बच्चे के साथ बैठकर चुपचाप से सुनते रहे।
दिव्यांग कृष्णा ने अपनी गायकी से जमकर वाहवाही लूटी
बहोरीबंद विकासखंड के तिगवॉं गांव के नेत्रहीन दिव्यांग कृष्णा चौधरी से शुक्रवार को कलेक्टर अवि प्रसाद की मुलाकात खास रही। नेत्रहीन दिव्यांग कृष्णा चौधरी के गले से निकली मधुर आवाज और ढोलक पर पड़ती नन्हें हाथों की थाप में कटनी कलेक्टर मुरीद हो गए। लय और ताल के संगम के बीच नेत्रहीन कृष्णा की मधुर आवाज ने माहौल को संगीतमय कर दिया। दिव्यांग कृष्णा ने अपनी गायकी और लोकगीत से जमकर वाहवाही लूटी।
Recommended Video
कलेक्टर अवि प्रसाद शुक्रवार को जब तिगवॉं गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने कलेक्टर के सामने इस दिव्यांग बच्चे कृष्णा की जमकर तारीफ कर दी। कलेक्टर से रहा नहीं गया और उन्होंने कह दिया कि एक गीत सुनाइए। बस फिर क्या था कृष्णा की तो मानों मनचाही मुराद पूरी हो गई। गले में लटकी ढोलकी पर नन्हे हाथों का जादू चल पड़ा, कंठ से निकली सुरीली भजन दही खा लो मटकिया नै फोड़ो.. नै फोड़ो.. कान्हा नै फोड़ो.. जिसने भी सुनी, मंत्रमुग्ध होकर सुनते ही रह गए। इधर कलेक्टर भी पास में बैठकर भक्ति रस में मगन होकर हिचकोले ले रहे थे।
कलेक्टर ने की गायन की जमकर सराहना
बच्चे की सुरीली गीत से अभिभूत हो चुके कलेक्टर अवि प्रसाद ने भजन सुनने के बाद उसे पुरस्कृत किया और उसके गायन कला की जमकर तारीफ की, नेत्रहीन स्कूल में पढ़ाई कर रहा है इन दिनों कृष्णा छुट्टियों में गांव आया हुआ है, लेकिन शायद उसे भी नहीं पता था कि गांव में उसे ऐसा अवसर मिल जाएगा, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि दिव्यांगों को प्रकृति किसी न किसी दिव्यता से जरूर नवाजती है।












Click it and Unblock the Notifications