ओमान से 11 महीने बाद कानपुर लौटी महिला ने सुनाई दर्दभरी दास्तां, बताया कैसे किया गया प्रताड़ित
कानपुर। यूपी के कानपुर में रहने वाली 55 वर्षीय अलीमुन्निसा को ट्रेवल एजेंट ने विजिट वीजा से नौकरी के लिए 23 अक्टूबर 2019 को ओमान भेजा था। अलीमुन्निसा से कहा गया था कि उसे वहां दो छोटे बेटों व एक बूढ़ी औरत की देखभाल करनी है। इसके बदले भारतीय करेंसी में 16 हजार रुपए और खाना-रहना मुफ्त होगा, लेकिन ओमान पहुंचने के कुछ दिनों बाद ही अलीमुन्निसा पर कहर बरपाया जाने लगा। छोटी-छोटी बातों पर अलीमुन्निशा को मारा-पीटा जाता था। पीड़िता ने बताया कि ओमान के मस्कट शहर पहुंचने पर उसे दूसरे एजेंट को बेच दिया गया और एजेंट ने उसे फातिमा नाम की महिला के सुपुर्द कर दिया।

रुपए लेकर बेचना चाहती थी महिला
अलीमुन्निसा के मुताबिक, ओमान में फातिमा नाम की महिला उसके साथ जानवरों जैसा बर्ताव करती थी। उसे मारा-पीटा जाता और उत्पीड़न किया जाता रहा। फातिमा उसे किसी दूसरे आदमी के हवाले करना चाहती थी। इसके लिए फातिमा ने उस आदमी से रुपए भी ले लिए थे। इस बीच उसने किसी तरह भारत में बेटे मोहसिन से संपर्क किया और सारी बात बताई। मां की हालत की जानकारी होने पर मोहसिन तड़प उठा और परिचितों को जानकारी दी। वह खुद ओमान जाने की सोचने लगा, लेकिन परिचितों के कहने पर उसने सबसे पहले सरकार से मदद की गुहार लगाई।
बेटे ने विदेश मंत्रालय से लगाई गुहार
मोहसिन ने मां को छुड़ाने के लिए विदेश मंत्रालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेज ओमान में मां को बेचने की बात बताई। इस बीच ओमान में विजय लक्ष्मी नाम की समाजसेवी ने भी उनको भारतीय दूतावास तक पहुंचने में मदद की। वहां संपर्क करने के बाद उनको शेल्टर होम में रखा गया। पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज मिलने के बाद उनको मस्कट से 25 अगस्त को लखनऊ भेज दिया गया। वहां से वे कानपुर आ गईं। ओमान से लौटी महिला ने अपने साथ हुए जुल्म की दास्ता बयां की है।












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