पिंटू गहलोत : हादसे में दोनों हाथ खो दिए, फिर बुलंद हौसलों से लिख दी कामयाबी की नई कहानी
जोधपुर, 8 मार्च। राजस्थान के जोधपुर जिले के बेटे ने कमाल कर दिखाया। हम बात कर रहे हैं खिलाड़ी पिंटू गहलोत की। पिंटू गहलोत ने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी। इन्होंने दो दुर्घटनाओं में अपने दोनों हाथ को खा दिया था। इसके बाद उनके जीवन यापन करने के लिए भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

पिंटू गहलोत ने सबसे पहले तैराकी में नाम कमाया
ऐसे में विपरीत परिस्थितियों में भी हौसला नहीं खोया। पिंटू गहलोत ने सबसे पहले तैराकी में नाम कमाया। कोरोना महामारी के बावजूद भी पिंटू ने कड़ी मेहनत करते हुए ताइक्वांडो मार्शल आर्ट में महारत हासिल की। पिंटू पैरा एशियन प्रतियोगिता में भी देश का नेतृत्व करने जा रहे हैं।

कोच ने ताइक्वांडो की ट्रेनिंग शुरू कर दी
दरअसल, कोरोना के दौरान सभी जगह जब स्विमिंग पूल बंद हो गए थे। तब पिंटू के कोच ने ताइक्वांडो की ट्रेनिंग शुरू कर दी। एक बारगी तो कोच भी हैरान रह गए। उन्हें पिंटू की बात पर विश्वास नहीं हुआ। पिंटू ने दृढ़ संकल्प कर रखा था। महज 7 महीने की ट्रेनिंग में बाद पिंटू गहलोत को ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट मिल चुका है। पिंटू गहलोत का चयन आगामी 11 मार्च से 15 मार्च 2022 को ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले अंतरराष्ट्रीय पैरा वर्ल्ड कप एशिया रीजन 2022 के लिए पांच सदस्य भारतीय दल में चयन हुआ है।

कुछ भी बता दो वह कभी नहीं भूलते
पिंटू गहलोत के कोच परमिंदर सिंह एनर्जी बूस्टर कहते हैं कि कुछ भी बता दो वह कभी नहीं भूलते। मेहनत और लगन के साथ पिंटू अपने मिशन के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उम्मीद है कि भारत के लिए वे गोल्ड मेडल जीतकर लाएंगे। पिंटू गहलोत चोखा गांव के रहने वाले हैं।
वर्ष 1998 में एक दुर्घटना में उन्होंने अपने हाथ को दिए इसके बाद उन्होंने अपने बाएं हाथ से सफलता की कहानी लिखने लगे। शुरुआत मे पिंटू गहलोत ने दृढ़ निश्चय के साथ ही तैराकी में 13 खिताब हासिल कर अथक प्रयासों से अपनी पहचान बनाई 7 साल की कड़ी मेहनत के बाद पिंटू गहलोत ने जोधपुर में आयोजित राज्य सेवा चैंपियनशिप जीती।

100 मीटर बैक स्ट्रोक में स्वर्ण पदक
पिंटू गहलोत ने 100 मीटर बैक स्ट्रोक में स्वर्ण पदक और 50 मीटर फ्रीस्टाइल टूर्नामेंट में रजत पदक जीता। उसके बाद कभी वह पीछे मुड़कर नहीं देखा हालांकि पिंटू गहलोत के जीवन में 2019 में एक दुखद घटना घटी जबलपुर में हुए एक हादसे में पिंटू का दूसरा हाथ छतिग्रस्त हो गया।
उनका हाथ काटना पड़ा इसके बाद पिंटू गहलोत को लोग ताने देने लगे। पिंटू ने उन्हीं तानो को अपना सीडी बनाई और सफलता की सीडी को चूमने लगे। नतीजे आज पिंटू गहलोत भारत का नेतृत्व करने ईरान जा रहे है।












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