भंवरी देवी केस : पूर्व विधायक मलखान सिंह विश्नोई को भी हाईकोर्ट से मिली जमानत
जोधपुर, 18 अगस्त। राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को भंवरी प्रकरण में पूर्व विधायक मलखान सिंह विश्नोई को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मलखान करीब दस वर्ष से जेल में बंद है। वह भंवरी देवी के अपहरण और हत्या की साजिश रचने में पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा के साथ मुख्य आरोपी है। इस तरह भंवरी प्रकरण में गिरफ्तार 17 में से अब तक आठ आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। जबकि महिपाल इलाज कराने के लिए अंतरिम जमानत पर है। ट्रायल कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद मलखान की तरफ से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई।

मलखान के छोटे भाई परसराम को दस दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
अधिवक्ता संजय विश्नोई ने बताया कि न्यायाधीश दिनेश मेहता ने मलखान के छोटे भाई परसराम को दस दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत के आधार पर जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया। उल्लेखनीय है कि सीबीआई की जांच में सामने आया था कि मलखान और भंवरी के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हुआ था। मलखान के माध्यम से ही भंवरी की मुलाकात महिपाल मदेरणा से हुई थी। मलखान व भंवरी के बीच प्रेम प्रसंग काफी आगे बढ़ गया था। इसकी आंच मलखान के घर तक पहुंचने लग गई थी। इसके बाद परिवार के कुछ सदस्यों ने भंवरी से पीछा छुड़ाने की योजना तैयार की थी।
यह है भंवरी देवी केस जोधपुर
जोधपुर जिले के बिलाड़ा थाने में अमरचंद नाम के एक व्यक्ति ने एक सितम्बर 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसकी पत्नी एएनएम भंवरी देवी लापता है। साथ ही उसने अपनी पत्नी के अपहरण की आशंका जताते हुए तत्कालीन राज्य सरकार में मंत्री महिपाल मदेरणा सहित दो तीन लोगों पर शक जाहिर किया। इसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।

सीबीआई ने किया था गिरफ्तार
मामले की जांच कुछ आगे बढ़ती इस बीच राज्य सरकार ने बढ़ते विरोध को ध्यान में रख मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने तीन दिसम्बर 2011 को महिपाल मदेरणा के पूछताछ की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बाद में इस मामले में कांग्रेस विधायक मलखान सिंह विश्नोई का भी नाम आया। उन्हें भी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

शव की राख नहर में बहाई
इसके अलावा इस मामले में 15 अन्य गिरफ्तारियां भी हुई। इसके बाद से महिपाल व मलखान अभी तक जेल में ही है। सीबीआई का दावा है कि भंवरी देवी का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई। बाद में शव को जला कर उसकी राख को राजीव गांधी लिफ्ट नहर में बहा दिया गया। यह मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है।












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