Jharkhand Politics: चम्पाई सोरेन की बगावत पर क्यों खामोश हैं हेमंत सोरेन?
झारखंड में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के फैसले पर अपनी चुप्पी अब तक जारी रखी है।
हेमंत सोरेन ने सिर्फ ये संकेत दिया है कि "लोग तय करेंगे कि उनकी सरकार में कोई कमी रही है या नहीं"। ऐसे में कईयों के मन में ये सवाल है कि चम्पाई सोरेन की बगावत पर आखिर हेमंत सोरेन खामोश क्यों हैं? आखिर क्यों वो फ्रंट फुट पर आकर नहीं खेल रहे हैं?

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चम्पाई के क्षेत्र में जाकर भी हेमंत ने नहीं लिया उनका नाम
चम्पाई सोरेन के भाजपा में शामिल होने के एक दिन बाद 31 अगस्त को हेमंत सोरेन ने चम्पाई के गृह निर्वाचन क्षेत्र सरायकेला विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे थे। यहां हेमंत सोरेन ने एक सार्वजनिक समारोह को संबोधित किया, लेकिन उन्होंने चम्पाई पर एक शब्द नहीं बोला।
पत्रकारों द्वारा चम्पाई सोरेन के फैसले के बारे में पूछे जाने पर हेमंत सोरेन ने केवल इतना कहा, ''राज्य की जनता तय करेगी कि हमारी सरकार में कोई कमी रही है या नहीं।''
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आखिर क्यों चम्पाई सोरेन को लेकर खुलकर नहीं बोल रहे हैं हेमंत सोरेन?
अगर आप पिछले कुछ सालों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और हेमंत सोरेन के काम करने का पैटर्न देखेंगे तो आप पाएंगे कि वह अपने बागी नेताओं के खिलाफ ज्यादा उग्र रवैया नहीं अपनाते हैं। जेएमएम हमेशा अपने नेताओं के वापसी के दरवाजे खुले रखना चाहता है।
अगर चम्पाई सोरेन के मामले को देखा जाए तो हेमंत इनके खिलाफ बोलकर आदिवासी समुदाय को नाराज नहीं करना चाहेंगे। अगर हेमंत चम्पाई के बारे में ज्यादा बोलेंगे तो ऐसा संभव है कि चम्पाई को सहानुभूति मिले। जो हेमंत कभी नहीं चाहेंगे।
वहीं हेमंत सोरेन चम्पाई के जेएमएम में वापसी के रास्ते खुले रखना चाहते हैं। चुनावी उठापटक पार्टी के नेताओं को भी ये कहा गया है कि वो मीडिया में चम्पाई सोरेन के बारे में तीखी प्रतिक्रिया ना दें। हेमंत सोरेन किसी भी तरह से चम्पाई सोरेन को इस घटनाक्रम से और ज्यादा राजनीतिक लाभ नहीं उठाने देना चाहते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक हेमंत सोरेन के एक करीबी सूत्र ने कहा, "चम्पाई के भाजपा में जाने से हम सतर्क हैं लेकिन झामुमो से अलग होने पर पार्टी पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है। हम चम्पाई पर ज्यादा हमलावर नहीं हो सकते हैं। अगर आपने ध्यान दिया होगा तो देखा होगा कि चम्पाई भी सीधे हेमंत सोरेन पर ज्यादा हमला नहीं कर रहे हैं। उन दोनों नेताओं के बीच फिलहाल कोल्ड वॉर चल रहा है।''
अब ये देखने वाली बात होगी कि हेमंत सोरेन कब तक चम्पाई सोरेन पर चुप्पी साधे रखते हैं। राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा है कि हेमंत कभी भी खुलकर चम्पाई सोरेन पर वार नहीं करेंगे।
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