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Saraikela Chunav Result 2024: 'हम जनादेश का सम्मान करते हैं', जीत के बाद बोले चंपाई सोरेन

Saraikela Chunav Result 2024: झारखंड के सरायकेला विधानसभा चुनाव 2024 में सियासी दांवपेच और गठजोड़ के बीच भाजपा के उम्मीदवार चंपाई सोरेन ने जीत हासिल कर ली है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से अलग होकर भाजपा का दामन थामने वाले चंपाई सोरेन को जनता का समर्थन मिला है।

2024 के चुनाव में सरायकेला सीट पर कुल 13 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे। इनमें प्रमुख मुकाबला भाजपा के चंपाई सोरेन और JMM के गणेश महली के बीच था। इसके अलावा बीएसपी के रविंद्र उरांव और 5 निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे। इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 3.69 लाख मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाता 1.83 लाख और महिला मतदाता 1.85 लाख हैं। 13 नवंबर को हुए मतदान में 72.35% वोटिंग हुई।

Champai Soren

गणेश महली: JMM के उम्मीदवार
गणेश महली, जो पहले भाजपा के टिकट पर 2014 और 2019 के चुनाव लड़ चुके थे, इस बार JMM से मैदान में थे। उन्होंने 2014 और 2019 में भी चंपाई सोरेन को कड़ी टक्कर दी थी, लेकिन जीत नहीं पाए। इस बार वे JMM की ओर से चुनाव लड़े, लेकिन चंपाई की लोकप्रियता के आगे कमजोर पड़ गए।

चंपाई सोरेन की बढ़त का क्या है मतलब?
चंपाई सोरेन की बढ़त और संभावित जीत भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। JMM छोड़ने के बाद चंपाई ने यह साबित कर दिया कि उनकी लोकप्रियता किसी पार्टी की सीमाओं से परे है।

चंपाई का भाजपा में जाना क्यों अहम है?
चंपाई सोरेन का BJP में शामिल होना और सरायकेला सीट पर उनकी बढ़त भाजपा की क्षेत्रीय पकड़ को मजबूत करता है। उनकी पहचान और "झारखंड टाइगर" की छवि ने भाजपा को सरायकेला में बढ़त दिलाई है।

चंपाई सोरेन की जीत की अहम बातें:

  • पार्टी बदलकर भी मजबूत पकड़: चंपाई ने JMM छोड़कर भाजपा में जाने के बावजूद जनता का भरोसा जीता।
  • अनुभव का फायदा: 6 बार विधायक रह चुके चंपाई का अनुभव और जनता से जुड़ाव उनकी ताकत है।
  • सरायकेला सीट का महत्व: यह सीट झारखंड में राजनीतिक समीकरण बदलने का बड़ा केंद्र मानी जाती है।

चंपाई सोरेन: 'झारखंड टाइगर' का सफर
चंपाई सोरेन झारखंड की राजनीति का एक बड़ा नाम हैं। उन्हें 'झारखंड टाइगर' के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1991 में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और एक बार निर्दलीय और 5 बार JMM के टिकट पर सरायकेला सीट से जीत दर्ज की।

कैसा है राजनीतिक सफर?

  • 1991: निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सरायकेला उपचुनाव जीता।
  • JMM में शामिल होकर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के करीबी बने।
  • 2024: JMM छोड़कर भाजपा में शामिल हुए।

परिवार में कौन-कौन?
चंपाई सोरेन का जन्म 1956 में सरायकेला के जिलिंगगोड़ा गांव में हुआ। खेती से शुरुआत करने वाले चंपाई ने शिक्षा के तौर पर सिर्फ मैट्रिक तक पढ़ाई की है। उनके परिवार में पत्नी मानको सोरेन, 4 बेटे और 3 बेटियां हैं।

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