झारखंड: मुख्यमंत्री पशुधन योजना से बढ़ रही हजारों परिवारों की आय, संवर रहा जीवन
झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार प्रदेश के सभी जिलों में पशु-पक्षी पालन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना चला रही है। इसके तहत बकरे, सुअर, कुक्कुट, ब्रायलर कुक्कुट, बत्तख आदि के पालन में सरकार की ओर से सहयोग किया जाता है। लाचार महिलाओं के लिए तो हेमंत सरकार ने इस योजना के तहत एक तरह से सरकारी खजाना ही खोल रखा है और उनके लिए पशुधन विकास योजना में अब 90 प्रतिशत तक अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। सबसे बड़ी बात ये है कि राज्य की एक बड़ी आबादी आज भी पशु-पक्षियों, मवेशियों का पालन करके अपनी आजीविका चला रही है और उसमें उन्हें यदि सरकारी सहायता मिल जा रही है तो उनकी जिंदगी से अंधेरा दूर हो पा रहा है। क्योंकि, पशुधन गरीब परिवारों के लिए एक तरह से चलती-फिरती एटीएम मशीन की तरह होते हैं।

पशुधन योजना से संवर रही गरीबों की जिंदगी
झारखंड सरकार ने हाल ही में एक बड़ा फैसला लिया है कि किसी हादसे के शिकार हुए परिवार की महिला या मजबूर और दिव्यांग महिलाओं को 90% के अनुदान पर दो दुधारू मवेशी (गाय या भैंस) उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे पहले इसपर सिर्फ 50% अनुदान की व्यवस्था थी। यही नहीं, राज्य सरकार ने अब यह भी कदम उठाया है कि बाकी पशु पक्षियों का पालन करने वालों को भी बकरा, सुअर, कुक्कुट पालन, ब्रायलट कुक्कुट पालन और बत्तख-चूजा पालन के लिए भी 50 के बदले 75% अनुदान का लाभ मिलेगा।
एसटी-एससी और पिछड़ों को मिल रहा है लाभ
यहां यह बताना जरूरी है कि इन योजनाओ का लाभ अधिकतर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अतिरिक्त पिछड़ा वर्ग,अल्पसंख्यक और महिलाओं का प्रमुखता से दिया जा रहा है। झारखंड सरकार की इस योजना ने गरीब परिवारों के जीवन बदलने का काम किस तरह से किया है, इसके एक प्रमुख उदाहरण डुमरिया ब्लॉक के आमदा गांव में रहने वाले भीमो सबर हैं। उन्होंने सुअर पालन में सरकारी सहायता का लाभ तो उठाया ही, उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर दूसरे पशुपालकों को भी हौसला दिया है।
आमदनी बढ़ाने का मिल रहा अवसर
दअरसल, पिछले साल ही मुख्यमंत्री पशुधन योजना के माध्यम से इस गांव के 6 परिवार को सुअर, तीन परिवारों को बकरियां और तीन परिवारों को बत्तख दिए गए थे। जिस भीमो सबर के परिवार को पांच सुअर मिले थे, उनके पास अब इसकी संख्या 8 हो चुकी है। यानि अब उनके पास उसे बेचकर अपनी आय बढ़ाने का एक बेहतर अवसर मौजूद है। क्योंकि, यह सिलसिला आगे भी जारी रहने वाला है।
हेमंत सोरेन सरकार की ओर से इस योजना को शुरू करने का एकमात्र उद्देश्य पशुपालकों की आमदनी बढ़ाकर उनका जीवन स्तर ऊंचा उठाना है। पिछले साल शुरू की गई यह योजना झारखंड के ग्रामीण विकास, कल्याण और कृषि विभाग की ओर से चलाई जा रही है। इस योजना के तहत पशु शेड बनवाने में भी सरकारी सहायता दी जाती है।












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